ब्रेकिंग
Ludhiana Theft News: लुधियाना में शातिर चोरों का आतंक; घर की दूसरी मंजिल पर धावा बोलकर लाखों के जेवर... Ludhiana Chain Snatching: सिविल लाइंस में महिला लेक्चरार से दिनदहाड़े लूट; बाइक सवार बदमाशों ने तोड़ी ... Ludhiana Crime News: लुटेरों के आगे 'शेरनी' बनी महिला; हथियार दिखाकर लूटना चाहा, पर बहादुरी से डट गई... Gurdaspur Crime News: दीनानगर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई; कार से 13 पेटी अवैध शराब बरामद, एक गिरफ्तार Punjab Weather Alert: पंजाब के 16 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट; तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी Haryana-UP Border Operation: अवैध लिंग जांच पर हरियाणा सरकार की सख्त कार्रवाई; उत्तर प्रदेश के साथ म... India Book of Records 2026: स्केटिंग और बास्केटबॉल का अनूठा तालमेल; 6 साल के बच्चे ने किया विश्व रिक... Haryana Congress News: हरियाणा कांग्रेस में बड़ा फेरबदल; ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की नियुक्तियो... Hisar Murder Case: हिसार में महिला की गला घोंटकर हत्या; 4 लाख के लेनदेन में पड़ोसी ने ही ली जान Haryana Development: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला; 1468 करोड़ की 32 विकास परियोजनाओं को मिली मंजूरी

Bargi Dam Cruise Accident: बरगी क्रूज हादसे में नया मोड़; प्रत्यक्षदर्शी ने लगाए गंभीर आरोप, एम्बुलेंस में नहीं था मेडिकल स्टाफ

जबलपुर के बहुचर्चित बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद रहे और बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के समक्ष कई गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हुए साक्ष्य के तौर पर वीडियो और पेन ड्राइव आयोग को सौंपी है।

🚑 ‘108 एम्बुलेंस में नहीं था कोई मेडिकल स्टाफ’

नीरज मिश्रा ने अपने दावों में बताया कि दुर्घटना के तुरंत बाद जब 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, तो उसमें चालक के अलावा कोई भी प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार (First Aid) नहीं मिल सका, जो उनकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी था। इस संबंध में उन्होंने 14 बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत शिकायत न्यायिक जांच आयोग को दी है।

📂 जांच आयोग के पास पहुंचे पुख्ता साक्ष्य

नीरज मिश्रा द्वारा सौंपी गई शिकायत में हादसे के बाद की स्थितियों का विस्तार से विवरण है। आयोग अब इन साक्ष्यों का परीक्षण करेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि बचाव कार्यों के दौरान प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान ने अब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

संपादकीय टिप्पणी: बचाव कार्यों में बुनियादी मेडिकल सुविधाओं का अभाव किसी भी बड़े हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़ा सकता है। क्या प्रशासन को ऐसी आपदाओं के लिए विशेष ‘डिजास्टर रिस्पांस प्रोटोकॉल’ को और अधिक सख्त नहीं करना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।