Mount Everest Tragedy: माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद 2 भारतीय पर्वतारोहियों की मौत; नीचे उतरते समय हुआ हादसा
काठमांडू: दुनिया की सबसे ऊंची और दुर्गम चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराने वाले दो जांबाज भारतीय पर्वतारोहियों की चोटी से नीचे उतरते समय मौत हो गई है। इनमें से एक वह पर्वतारोही भी शामिल हैं, जो महज दो दिन पहले माउंट एवरेस्ट पर एक साथ सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाले 274 पर्वतारोहियों के ऐतिहासिक वैश्विक ग्रुप का हिस्सा थे। नेपाल के एक वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी ने शुक्रवार को इस पर्वतारोहण त्रासदी के बारे में आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि दोनों भारतीय पर्वतारोहियों ने चोटी को छू लिया था, लेकिन ‘डेथ जोन’ से वापस नीचे बेस कैंप की तरफ उतरते समय अत्यधिक थकान और ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दिया।
🗻 एक दिन में सबसे अधिक चढ़ाई का बना था रिकॉर्ड: ऐतिहासिक कामयाबी के ठीक बाद भारतीय खेमे में पसरा सन्नाटा
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नेपाल के रास्ते से माउंट एवरेस्ट पर बीते बुधवार को 3 भारतीयों समेत रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने एक साथ सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की थी। यह एवरेस्ट के इतिहास में एक ही दिन के भीतर सबसे अधिक लोगों द्वारा चोटी पर पहुंचने का एक नया और अटूट विश्व रिकॉर्ड था। इस अभूतपूर्व कामयाबी से पूरे कैंप में जश्न का माहौल था, लेकिन प्रकृति के कठिन मिजाज के आगे यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी और डेथ जोन से सुरक्षित वापसी के दौरान दो भारतीय पर्वतारोहियों की असमय मौत से पूरे पर्वतारोहण जगत और भारतीय खेमे में गहरा सन्नाटा पसर गया।
💔 “गाइडों ने बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन टूट गई सांसें”: एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने दी पूरी जानकारी
नेपाल के प्रतिष्ठित एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महासचिव ऋषि भंडारी ने इस दर्दनाक हादसे के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि मृत भारतीय पर्वतारोहियों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे के रूप में पुख्ता की गई है। ये दोनों पर्वतारोही चोटी से नीचे उतरते समय अत्यधिक शारीरिक थकावट, अत्यधिक ठंड और हाइपोथर्मिया का शिकार हो गए थे। संकट भांपते ही उनके साथ मौजूद पेशेवर शेरपा गाइडों की ओर से उन्हें बचाने और सुरक्षित निचले कैंपों तक लाने के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर पूरी कोशिश की गई, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई पर तबीयत तेजी से बिगड़ने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
ऋषि भंडारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को बताया कि उपलब्ध लॉग्स के अनुसार, संदीप अरे बुधवार को और अरुण तिवारी गुरुवार की शाम करीब 5:30 बजे एवरेस्ट के शीर्ष शिखर पर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि उनके गाइडों ने उन्हें प्राथमिक चिकित्सा और एक्स्ट्रा ऑक्सीजन देने के लिए “बहुत कड़ी मेहनत की” लेकिन वे उनके प्राण नहीं बचा पाए। संदीप अरे की मौत गुरुवार को हुई थी, जबकि अरुण तिवारी की मृत्यु के सटीक समय का पूरी तरह साफ होना अभी बाकी है।
📜 274 लोगों की टीम में शामिल थे कई भारतीय जांबाज: वसंत ऋतु 2026 में रिकॉर्ड 502 पर्वतारोहियों को मिली थी अनुमति
इससे पहले बुधवार को, दिवंगत संदीप अरे समेत 3 भारतीय उन 274 जांबाज पर्वतारोहियों के विशाल समूह का मुख्य हिस्सा थे, जिन्होंने 8,848.86 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कदम रखा था। विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली इस ऐतिहासिक टीम में संदीप अरे के साथ-साथ अन्य दो भारतीय पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी और अजय पाल सिंह धालीवाल भी शामिल थे, जो सुरक्षित हैं। इसके अगले ही दिन, यानी गुरुवार को भारत की एक और महिला पर्वतारोही लक्ष्मीकांता मंडल भी दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी के शीर्ष पर पहुंचने में कामयाब रही थीं।
ऋषि भंडारी ने पहले स्पष्ट किया था कि बुधवार को फतह करने वाले 274 पर्वतारोहियों में 150 कुशल नेपाली शेरपा भी शामिल थे, जो गाइड के रूप में एक ही दिन में चोटी पर पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस चालू वसंत सत्र (Spring Season) में एवरेस्ट पर चढ़ने वालों ने यह नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। गौरतलब है कि वसंत 2026 के इस सीजन में नेपाल सरकार द्वारा एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए दुनिया भर के रिकॉर्ड 502 पर्वतारोहियों को आधिकारिक रूट परमिट जारी किया गया था। फिलहाल दोनों भारतीयों के पार्थिव शरीरों को नीचे लाने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।