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Tamil Nadu Elections 2026: ‘थलापति’ विजय का चला जादू; 2 साल पुरानी पार्टी TVK ने कैसे ढहाए दिग्गजों के किले?

महज दो साल पुरानी पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु की 50 साल से ज्यादा समय से चली आ रही दो धुर्वों में बंटी राजनीति को हिला कर रख दिया. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को हुई मतगणना में अभिनेता से नेता बने विजय ने 100 से ज्यादा सीटों पर बढत बना रखी है. नतीजें बताते हैं कि फिल्म सुपरस्टार विजय अपनी सिनेमाई लोकप्रियता को वोटों में बदलने में कामयाब रहे. नतीजा विजय की ऑन स्क्रीन लोकप्रिय तमिलनाडु में राजनीतिक ताकत के रूप में जनता के सामने है.

तमिलनाडु की जनता राजनीति के द्रविड़ मॉडल से ऊब गई थी. राज्य में बारी बारी से कभी डीएमके तो कभी एआईएडीमके की सरकार में तमिलनाडु की जनता बदलाव चाहती थी. उनको विजय में उम्मीद और विकल्प दिखा.

खासकर राज्य के युवाओं और महिला वोटरों में विजय का जबरदस्त क्रेज था. फिल्मों की तरह असल जावन में भी विजय युवाओं को एक शांत पर पुराने पड़ चुके राजनीतिक ढर्रे को तोड़ने वाले हीरो के रूप में नजर आए.

सिनेमाई करिश्मा बना चुनावी ताकत

विजय ने अपना प्रोजेक्शन एक ऐसे नेता के तौर पर किया जो द्रविड़ आईडेंटिटी का सम्मान तो करता है पर जाति और धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण के खिलाफ है. विजय ने राज्य के दलित और अल्पसंख्यक वोटरों के एक बड़े हिस्से को भी अपनी तरफ खींचा.

लेकिन विजय के लिए राह उतनी आसान नहीं रही. पिछले साल सितंबर में विजय की करूर रैली में 41 लोगों की मौत के बाद से अब सत्ता की दहलीज तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा. विजय के पास दूसरे दलों जैसा कार्यकर्ताओं का संगठन नहीं था जो वोटरों को घर से निकालकर कर वोटिंग बूथ तक ले जाता है.

इसके लिए विजय ने राज्य भर में फैले अपने फैन क्लब का सहारा लिया. दरअसल विजय ने राजनीति में आने से पहले अपने फैन क्लब विजय मक्कल इयक्कम को तैयार किया. चुनावों में इसी फैन क्लब ने बूथ स्तर पर काम किया और सिनेमाई करिश्मा को वोटों में बदला.

DMK-AIADMK के एकाधिकार को चुनौती

तमिलनाडु में एक्ट विजय को सत्ता के नजदीक पहुंचाने में मौजूदा डीएमके सरकार की सत्ता विरोधी लहर ने भी मदद की. डीएमके की परिवारवाद की राजनीति, डीएमके नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप , कानून-व्यवस्था के मसले पर भी तमिलनाडु का जनता स्टालिन सरकार से परेशान थी.

सीएम स्टालिन के उत्तराधिकारी के तौर पर उदयनिधि स्टालिन के उभार में युवाओं को वंशवाद नजर आया. लिहाजा युवा को पूरी तरह एक्टर विजय के साथ हो लिए.

उधर AIADMK भी नेतृत्व की लड़ाई से बिखरता चला गया. ईपीएस और ओपीएस की गुटबाजी और पुराने नेताओं के साथ छोड़ने के चलते जनता और AIADMK कार्यकर्ताओं को पार्टी को लेकर भरोसे का संकट दिखा. असर ये हुआ कि एआईएडीएमके के भरोसेमंद वोटर जो डीएमके के साथ नहीं जा सकते थे. उन्होने भी एक्टर विजय की पार्टी में अपना नया ठिकाना ढूढा.

फैन क्लब, युवा और महिला वोटरों की भूमिका

विजय के शिक्षा, स्वास्थ्य को लेकर वादों ने पढ़ें लिखे मध्यम वर्ग को उम्मीद दी, जो डीएमके और एआईएडीएमके के फ्री वादों के कल्चर से परेशान थे.

विजय ने पूरे चुनाव में कोई इंटर्व्यू नही दिया, जिससे अनावश्यक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई से बचे रहे. विजय की पार्टी का छोटे छोटे गानों, वीडियो संदेश का सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन का तरीका भी शहरी और ग्रामीण वोटरों को खूब भाया.

जानकार बताते है कि न्यूट्रल और फ्लोटिंग वोटरों ने भी काफी हद तक विजय को वोट किया. भाषाई विवाद और रीजनल पहचान के मुद्दे पर बीजेपी के खिलाफ डीएमके को वोट करने वाले वोटरों ने भी विजय को ही विकल्प के तौर पर देखा.