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Jyeshtha Mah 2026: ज्येष्ठ माह शुरू; बड़ा मंगल से लेकर शनि जयंती तक, जानें इस महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार और महत्व

Puja Path in Jyeshtha Month 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई यानी आज शनिवार से हुई है, जो 31 मई तक चलेगा. दरअसल, इस बार अधिकमास का संयोग बना है तो जेष्ठ दो महीने चलेंगे. यह हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना है और अपनी भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना जल के संरक्षण और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश देता है. इसी महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे महान पर्व आते हैं, जो हमें संयम और दान का महत्व समझाते हैं.

इस समय सूर्य देव अपनी पूरी शक्ति के साथ तपते हैं इसलिए इस महीने को ‘ज्येष्ठ’ यानी बड़ा कहा जाता है. इस पावन महीने में किए गए धार्मिक कार्य और दान-पुण्य व्यक्ति को मानसिक शांति और अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं.

सूर्य और वरुण देव की उपासना का विशेष महत्व

ज्येष्ठ के महीने में सूर्य देव और वरुण देव की पूजा का सबसे अधिक विधान है क्योंकि इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है इसलिए जल के देवता वरुण देव की आराधना करना और प्यासे जीवों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है. शास्त्रों में उल्लेख है कि इस महीने में सूर्य देव का प्रभाव बहुत बढ़ जाता है, जिससे प्रकृति में जल की कमी होने लगती है. ऐसे में जल की बर्बादी न करना और जलाशयों की सफाई करना एक धार्मिक कर्तव्य बन जाता है. इस दौरान किए जाने वाले व्रत और पूजा का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को आत्म-नियंत्रण और कठिन परिस्थितियों में शक्तिशाली रहना सिखाना है. वरुण देव की कृपा से जीवन में शीतलता और सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

हनुमान जी और शनि देव की कृपा पाने का समय

ज्येष्ठ महीने में हनुमान जी और शनि देव की पूजा का भी गहरा संबंध है. धार्मिक कथाओं के अनुसार इसी महीने के बड़े मंगल को हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है क्योंकि इसी दौरान उनकी मुलाकात पहली बार भगवान राम से हुई थी. साथ ही, ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है, जो शनि देव के जन्मोत्सव का प्रतीक है. इन दोनों देवताओं की आराधना करने से भक्तों के जीवन के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं और ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं. विशेष रूप से बड़े मंगल पर भंडारा करना और लोगों को शीतल जल या शरबत पिलाना हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है. इससे व्यक्ति के भीतर साहस और सेवा भाव की वृद्धि होती है.

ज्येष्ठ माह के प्रमुख नियम और दान का फल

खान-पान और आराम: सेहत का ख्याल रखने के लिए इस महीने में एक समय हल्का और सादा खाना खाना चाहिए. साथ ही, दिन के समय सोने से बचने की सलाह दी जाती है.

ठंडी चीजों का दान: चिलचिलाती गर्मी से राहत देने वाली चीजों, जैसे पानी से भरा घड़ा, पंखा, छाता और सत्तू का दान करना इस समय बहुत शुभ होता है.

निर्जला एकादशी की महिमा: ज्येष्ठ की निर्जला एकादशी का व्रत सबसे बड़ा माना गया है. बिना पानी पिए यह व्रत रखने से साल की सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है.

मदद का भाव: यह महीना हमें सिखाता है कि कितनी भी मुश्किल घड़ी (तेज गर्मी) हो, हमें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए और दूसरों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए.

बरकत और खुशहाली: जो इंसान इस महीने दिल खोलकर जरूरतमंदों की सेवा और दान करता है, उसके घर से तंगी दूर होती है और आने वाला समय सुखद रहता है.