सरकारी दफ्तरों में ‘बिजली की बर्बादी’! करोड़ों का बिल बकाया, नगर निगम ने फिजूलखर्ची में सबको पीछे छोड़ा
देवघर: जिले में बिजली की बढ़ती खपत अब सिर्फ निजी घरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरकारी कार्यालय भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं. ताजा आंकड़े यह बताते हैं कि जिले के सरकारी दफ्तरों में बिजली का उपयोग इस कदर बढ़ गया है कि सालाना बिल करोड़ों की सीमा पार कर रहा है. यह स्थिति न सिर्फ खपत के पैमाने को दर्शाती है, बल्कि ऊर्जा संरक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़ा करती है.
बिजली विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद सरकारी कार्यालयों द्वारा जमा किए गए बिजली बिल में सबसे बड़ा हिस्सा नगर निगम का रहा. नगर निगम कार्यालय ने अकेले 6 करोड़ 23 लाख रुपये का भारी-भरकम भुगतान किया है, जो जिले में सर्वाधिक है. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि सरकारी संस्थानों में बिजली का उपयोग किस स्तर तक पहुंच चुका है.
इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय का स्थान आता है, जहां से लगभग 80 लाख रुपये का बिजली बिल जमा किया गया. वहीं उपायुक्त कार्यालय ने करीब 10 लाख रुपये, अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय ने 4 लाख रुपये और सिविल कोर्ट ने लगभग 6 लाख रुपये बिजली बिल के रूप में भुगतान किए हैं. ये आंकड़े सरकारी तंत्र में बिजली की खपत के व्यापक स्वरूप को उजागर करते हैं.
कार्यपालक अभियंता नीरज आनंद के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी सभी सरकारी कार्यालयों ने समय पर बिजली बिल का भुगतान किया है. उन्होंने बताया कि विभिन्न कार्यालयों को मिलाकर इस वर्ष करीब 21 करोड़ रुपये की राशि बिजली बिल के रूप में जमा की गई है. यह न केवल राजस्व का बड़ा स्रोत है, बल्कि खपत के बढ़ते स्तर की भी कहानी बताता है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली का उपभोग केवल आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थान भी इसकी बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं. ऐसे में ऊर्जा संरक्षण की जिम्मेदारी सिर्फ नागरिकों पर नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तरों पर भी समान रूप से लागू होती है. स्पष्ट है कि विकास की रफ्तार के साथ-साथ बिजली की खपत भी बेलगाम होती जा रही है. ऐसे में जरूरत है कि उपयोग के साथ-साथ बचत पर भी जोर दिया जाए.