ब्रेकिंग
MP Accident News: मध्य प्रदेश में भीषण सड़क हादसे, मुरैना में ससुर-दामाद समेत मंडला में 6 लोगों की द... Digital India in MP: अशोकनगर की पंचायत बनी मिसाल, वाई-फाई और सीसीटीवी से लैस गांव देख सिंधिया हुए इम... Satna Hospital News: सतना में किडनी चोरी का आरोप! ब्रेन ट्यूमर का होना था ऑपरेशन, मरीज के पेट में भी... MP Weather Update: मध्य प्रदेश में 4 वेदर सिस्टम सक्रिय, 30 जिलों में आंधी और झमाझम बारिश का रेड अलर... UCC Row: यूनिफॉर्म सिविल कोड के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती देने का क... Shashi Tharoor News: शशि थरूर के ड्राइवर और गनमैन पर जानलेवा हमला, पुलिस ने एक आरोपी को लिया हिरासत ... CSK vs PBKS IPL 2026: पंजाब किंग्स ने फिर भेदा चेपॉक का किला, IPL इतिहास में पहली बार घर में हारी चे... Junior Bachchan Parenting: अभिषेक बच्चन का बेटी आराध्या पर बड़ा बयान, बताया कैसे रखते हैं उसकी परवरि... Surat Textile Market Crisis: वैश्विक युद्ध की मार से सूरत का कपड़ा बाजार बेहाल, प्रोडक्शन में 30% तक... Induction Cooktop Science: बिना आग और बिना गर्म हुए कैसे पक जाता है खाना? समझें इंडक्शन के पीछे का प...

Nashik Police Controversy: आरोपियों से ‘कानून का गढ़’ बुलवाने पर विवाद, नासिक पुलिस के एक्शन पर उठे सवाल

Nashik News: महाराष्ट्र के नासिक से शुरू हुआ आरोपियों का कथित वॉक ऑफ शेम अब राज्य के अन्य जिलों तक पहुंच गया है और इस पर विवाद भी खड़ा हो रहा है. नासिक क्राइम ब्रांच कार्यालय के बाहर पिछले कुछ महीनों से एक जैसी चीजें बार-बार देखने को मिल रही हैं. आरोपियों को हिरासत से बाहर लाकर कैमरे के सामने खड़ा किया जाता है और उनसे यह नारा लगवाया जाता है ‘नासिक जिला कानून का गढ़ है’ कई वीडियो में आरोपी लंगड़ाते हुए, पुलिसकर्मियों के सहारे खड़े या माफी मांगते नजर आते हैं.

यह तरीका अब ठाणे के मुंब्रा और अकोला जैसे इलाकों में भी देखने को मिला है. मुंब्रा पुलिस स्टेशन के बाहर भी आरोपियों से कैमरे के सामने माफी मंगवाते हुए वीडियो सामने आए, जहां उनसे ‘ठाणे जिला कानून का गढ़ है’ का नारा लगवाया गया. हालांकि महाराष्ट्र के कानून एवं व्यवस्था महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने साफ किया है कि इस तरह के वीडियो बनाने के लिए कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं और न ही इसे प्रोत्साहित किया जाता है.

कहां से हुई इस नारे की शुरुआत?

नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने बताया कि इस चलन की शुरुआत नासिक से हुई. उनके अनुसार, पहले कुछ युवकों ने सोशल मीडिया पर नासिक को ‘अपराध का गढ़’ बताते हुए रीलें पोस्ट की थीं. इसके बाद पुलिस ने इस नारे को पलटते हुए गिरफ्तार आरोपियों से ‘कानून का गढ़’ कहलवाना शुरू किया.

इस पूरे मामले को लेकर कानूनी और नैतिक बहस तेज हो गई है. स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इसे अपराध पर त्वरित और सख्त कार्रवाई का प्रतीक मान रहे हैं. वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह न्यायिक प्रक्रिया और कानून के उचित पालन का उल्लंघन हो सकता है. आलोचकों का कहना है कि अदालत में दोष सिद्ध होने से पहले किसी आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई वीडियो स्थानीय न्यूज चैनलों और निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स से वायरल हुए हैं. कुछ मामलों में आरोपियों को कथित तौर पर पीटे जाने और कैमरे के सामने नारे लगवाने के आरोप भी लगे हैं. हालांकि पुलिस ने हिंसा के आरोपों से इनकार किया है.

पुलिस ने शुरू की हेल्पलाइन

सोशल मीडिया पर अपराध को बढ़ावा देने वाली रीलों को रोकने के लिए नासिक पुलिस ने एक हेल्पलाइन भी शुरू की है. नासिक में पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किए गए ‘वॉक ऑफ शेम के वीडियो में कई लोगों के नाम शामिल हैं.

सड़कों पर कथित अपराधियों से लेकर ऑनलाइन अपराधों का महिमामंडन करने वाले युवाओं तक, इसमें राजनीतिक कनेक्शन वाले लोग भी शामिल हैं. पूर्व पार्षद और आरपीआई नेता प्रकाश लोंढे और उनके बेटे, भाजपा पदाधिकारी मामा राजवाडे का नाम भी इसमें आया है.

पुलिस ने नासिक के कथित भोंदू बाबा अशोक खरात को भी गिरफ्तार किया है, जिन पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है. खरात का एक वीडियो कुछ दिन पहले वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रहा था कि ‘नासिक जिला कानून का गढ़ है’.