ब्रेकिंग
Indian Navy Power: भारतीय नौसेना में एक साथ शामिल हुए INS दूनागिरी, INS अग्रे और INS संशोधक; पीएम मो... TMC and Shiv Sena Crisis: टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत; बीजेपी पर लगे आरोप, नेतृत्व संकट पर ... Maharashtra Politics: संजय देशमुख के पाला बदलने की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे का वाशिम दौरा; पार्टी ... Veena T ED Summons: केरल के पूर्व सीएम की बेटी वीना टी की बढ़ी मुश्किलें; मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED... Ayodhya Ram Mandir Controversy: दान गबन मामले पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान; पूछा- अब तक FIR क्यों ... Khunti Encounter News: खूंटी में पुलिस और PLFI उग्रवादियों के बीच मुठभेड़; टॉप कमांडर श्रवण दास गिरफ... Nuh Encounter News: नूंह में पुलिस और पशु-तस्करों के बीच मुठभेड़; जवाबी फायरिंग में एक तस्कर घायल, क... Deoria Tragic Incident: फादर्स डे से ठीक पहले पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत; रेलवे ट्रैक पर सुसाइड करने ... Heartbreaking Father-Son Death: देवरिया में ट्रेन के सामने कटकर पिता-पुत्र ने तोड़ा दम; बचाने की कोश... NEET Re-Exam Bareilly: नीट पुनर्परीक्षा के दौरान छात्रा की बिगड़ी तबीयत; परीक्षा केंद्र पर बेहोश होक...

बड़ा झटका! दिल्ली-NCR में बंद हो सकती हैं 462 फैक्ट्रियां, CPCB की इस सख्ती से मचा हड़कंप; जानें वजह

दिल्ली NCR में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने की कोशिशों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्थित 462 फैक्ट्रियों को चिन्हित किया है, जो प्रदूषण की निगरानी के लिए जरूरी उपकरण लगाने में नाकाम रही हैं. इन सभी कंपनियों पर अब तालाबंदी या भारी जुर्माने जैसी सख्त कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने खास श्रेणी के उद्योगों के लिए ऑनलाइन कांटीन्यूअस इमीशन मॉनीटरिंग सिस्टम (OCEMS) लगाना अनिवार्य किया है. इस सिस्टम में आधुनिक कैमरे और सेंसर लगाए जाते हैं, जो फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और कचरे की रियल टाइम (सीधी) निगरानी करते हैं. इन उपकरणों को सीधे CPCB के सर्वर और पोर्टल से जोड़ा जाता है. इससे अधिकारियों को दफ्तर में बैठे ही पता चल जाता है कि कौन सी फैक्ट्री तय मानकों से ज्यादा प्रदूषण फैला रही है.

मानकों पर खरी नहीं उतरीं फैक्ट्रियां

CPCB की जांच में पाया गया कि चिन्हित की गई 462 फैक्ट्रियों ने या तो यह सिस्टम लगाया ही नहीं है, या फिर इनके उपकरण तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं. इसके चलते इन औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन की सटीक निगरानी संभव नहीं हो पा रही थी. इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए CPCB ने संबंधित राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को इन इकाइयों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

कौन-कौन से जिले हैं रडार पर?

चिन्हित की गई फैक्ट्रियों में दिल्ली की 3 इकाइयां शामिल हैं. इसके अलावा NCR के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के अंतर्गत हरियाणा के बहादुरगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रेवाड़ी, पलवल, झज्जर, जींद और करनाल, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और हापुड़ और राजस्थान के अलवर और खैरथल-तिजारा शामिल हैं.

हवा की गुणवत्ता सुधारने की कवायद

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के साथ-साथ साल भर वायु गुणवत्ता (AQI) एक गंभीर चुनौती बनी रहती है. CPCB का मानना है कि उद्योगों द्वारा रियल टाइम डेटा साझा न करना प्रदूषण नियंत्रण की राह में एक बड़ा रोड़ा है. इस कार्रवाई का उद्देश्य उद्योगों को जवाबदेह बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी इकाई गुप्त रूप से जहरीली गैसों का उत्सर्जन न कर सके.