ब्रेकिंग
IND vs AFG ODI Series: भारतीय पेसर्स का घातक हथियार 'शॉर्ट बॉल'; अफगानिस्तान की हार का सबसे बड़ा कारण Sanchita Ugale Death: 22 साल की एक्ट्रेस के निधन पर करणवीर बोहरा का बड़ा बयान; टीवी इंडस्ट्री के 'कड़व... G-7 Summit Viral Video: इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी की बेटी का वीडियो वायरल; कैमरे के सामने शर्मा... LPG Price Update: रसोई गैस की कीमतों में बड़ा अंतर; जानें मुंबई से लेह तक क्या है आपके सिलेंडर का रे... Petrol Diesel Price Today: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद क्या सस्ते हुए पेट्रोल-डीजल? जानें ... Nirjala Ekadashi 2026: इस बार निर्जला एकादशी पर बन रहे 4 दुर्लभ महासंयोग; जानें शुभ मुहूर्त और पूजा ... Monsoon Skin Care: ऑयली स्किन से हैं परेशान? मानसून में चिपचिपाहट दूर करने के असरदार घरेलू उपाय Telegram Ban & VPN: NEET परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर पाबंदी, यूजर्स VPN के जरिए लगा रहे जुगाड़ Tonk Murder Case: चांदी के गहनों के लालच में पड़ोसन की बेरहमी से हत्या; 10 थानों की पुलिस ने ऐसे पकड़ा... Sitapur Crime News: वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए 25 महिलाओं को बनाया शिकार; करोड़ों की ठगी करने वाला अन...

हरीश राणा को मिली ‘दर्द’ से मुक्ति! 13 साल के इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; जानें कैसे होगी इच्छा मृत्यु की पूरी प्रक्रिया

32 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर परोक्ष इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के लिए एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर विभाग में रखा गया है. डॉक्टर उनकी स्थिति को लेकर फिलहाल कोई निश्चित समय नहीं बता पा रहे हैं. एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एम.सी. मिश्रा का कहना है कि हरीश की मौत में कितना समय लगेगा, यह बता पाना संभव नहीं है.

डॉ. एम.सी. मिश्रा ने बताया कि पैसिव यूथेनेसिया की स्थिति में मरीज की मौत में कुछ समय लग सकता है और यह कहना मुश्किल है कि इसमें कितने दिन लगेंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हरीश राणा की हालत में बदलाव आने में कितना वक्त लगेगा. उन्होंने बताया कि अगर भोजन की व्यवस्था को कम किया जाता है तो मृत्यु की प्रक्रिया तेज हो सकती है. हालांकि वर्तमान स्थिति में किसी भी तरह के नए इलाज की योजना नहीं है, क्योंकि यह मामला पैलिएटिव केयर के तहत रखा गया है.

हरीश को नहीं हो रहा दर्द महसूस

डॉ. मिश्रा ने कहा कि पैलिएटिव केस में मरीज को केवल दर्द से राहत देने के लिए पेन मैनेजमेंट किया जाता है. हालांकि हरीश राणा के मामले में यह बात सामने आई है कि उन्हें किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं हो रहा है. वहीं एम्स प्रशासन का कहना है कि, मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक देखभाल जारी है. बता दें कि यह पूरी कार्रवाई सीएमओ की देखरेख में की गई यह भारत में पहला ऐसा मामला है जहां सुप्रीम कोर्ट ने किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु की अनुमति दी है.

वर्ष 2013 से कोमा में हैं हरीश

हरीश वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में एक हादसे में चौथी मंजिल से गिरने के बाद स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में हैं. पिछले 13 वर्षों से वे अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े हुए हैं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर हैं. उनके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लाइफ सपोर्ट हटाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है.