ब्रेकिंग
Namo Bharat Train: अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 55 मिनट में, सराय काले खां से मोदीपुरम तक दौड़ने को तैयार... Anant Bhaskar Murder Case: आंध्र प्रदेश के पूर्व MLC अनंत भास्कर पर हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने... सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बंगाल में न्यायिक नियुक्तियों पर जारी खींचतान पर SC का बड़ा फैसला, अधिकारिय... बड़ी खबर: क्या बाबरी के नाम पर बन सकती है नई मस्जिद? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया झटका, सुनव... Greater Noida News: रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक घंटे तक बाथरूम में बंद रही मासूम छात्रा, परिजनों ने ... भगवान को लिखा 'जॉब लेटर': छात्र ने मांगी 20 लाख के पैकेज वाली नौकरी, बदले में भगवान को दिया ये अनोखा... चुगली की तो कटेगी जेब! अब इधर-उधर की बातें की तो देना होगा भारी जुर्माना, जानें इस अनोखे फैसले के पी... Bihar Assembly News: 'ब्राह्मण' शब्द पर बिहार विधानसभा में हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले- "मै... Rahul Gandhi Sultanpur Visit: सुल्तानपुर में फिर मोची रामचेत की दुकान पर रुके राहुल गांधी, बेटी के इ... AAP Attacks Opponents: महिलाओं को 2500 रुपये, प्रदूषण और युवा; आप ने 15 सवालों के जरिए सरकार को घेरा

Share Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के डूबे 6 लाख करोड़; जानें गिरावट के 5 बड़े कारण

भारतीय शेयर बाजार अभी कब ऊपर जाएगा और कब एक दम से धड़ाम हो जाएगा कुछ कहा नहीं जा सकता है. सेंसेक्स और निफ्टी की चाल बहुत ही तेजी से बदल रही है. गुरुवार 19 फरवरी के दिन भी कुछ यूं ही हुआ मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबार के समय करीब 1100 अंक नीचे गिर गया. वहीं, निफ्टी 50 भी ट्रेड के समय अपने डे लो 25,567.75 पर पहुंच गया. मार्केट की इस बिकवाली में मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों को ज्यादा नुकसान हुआ. निवेशकों के करीब-करीब 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए. अब यह सवाल आता है कि बाजार आज इतना क्यों गिर गया. क्या ऐसे निगेटिव ट्रिगर रहे, जिन्होंने निवेशकों के पैसे डुबा दिए?

शेयर बाजार की इस गिरावट में बीएसई की बड़ी लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप काफी कम हो गया. बीते कारोबारी दिन में BSE का मार्केट कैप जो पिछले सेशन में 472 लाख करोड़ रुपये था. वह घटकर 466 लाख करोड़ रुपये हो गया. यानी निवेशकों को भारी नुकसान हो गया.

क्यों गिर रहा है बाजार

    1. मुनाफावसूली का दिखा असर- हालिया बढ़त के बाद घरेलू बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल रही है. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने लगातार तीसरे सत्र में बढ़त जारी रखी. बजट, भारत-अमेरिका समझौता और आरबीआई की नीति जैसे बड़े आर्थिक कारणों के खत्म होने और तीसरी तिमाही के नतीजों का दौर पूरा होने के बाद, नए घरेलू कारणों की कमी की वजह से बाजार में शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
    2. फेड मीटिंग का असर- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जनवरी में हुई बैठक से पता चलता है कि अधिकारी आगे की रणनीति को लेकर बंटे हुए हैं. कुछ लोग मानते हैं कि अगर महंगाई कम होती है तो राहत मिल सकती है, जबकि दूसरे मानते हैं कि अगर कीमतों का दबाव बना रहा तो सख्ती जारी रखनी पड़ेगी. ब्याज दरों में कटौती पर लंबे समय तक रोक या अमेरिकी फेड द्वारा फिर से दरें बढ़ाने से डॉलर मजबूत हो सकता है. इससे भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है. नकदी बाजार में लगातार सात महीनों की बिकवाली के बाद फरवरी में विदेशी निवेशकों की खरीदारी फिर से शुरू हुई है.

  1. अमेरिका-ईरान तनाव पर बाजार की नजर- बुधवार को सीएनएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सेना इस सप्ताहांत तक ईरान पर हमला करने की तैयारी में है. एक्सियोस ने बताया कि यह हमला छोटा नहीं बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा अभियान हो सकता है, जो लगभग युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. बाजार अमेरिका-ईरान संबंधों से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक हफ्ते के आखिरी में तनाव बढ़ने की आशंका से अपनी पोजीशन घटा रहे हैं.
  2. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार पर असर डाला है. पिछले सत्र में डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स 4.60% बढ़कर 65.19 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.35% बढ़कर 70.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. गुरुवार को भी ब्रेंट क्रूड 70.53 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 65.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. ऊंची तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सही नहीं मानी जातीं, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है.
  3. तुरंत पॉजिटिव ट्रिगर की कमी- विशेषज्ञों का मानना है कि उम्मीद के मुताबिक आय और मजबूत आर्थिक हालात के चलते कैलेंडर वर्ष 2026 में घरेलू बाजार में अच्छी तेजी आ सकती है, लेकिन नए ट्रिगर की कमी के कारण बाजार को आगे बढ़ने में दिक्कत हो रही है. लार्ज कैप कंपनियों के शेयर अब ठीक वैल्यूएशन पर हैं, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर अभी भी महंगे हैं. इसी वजह से बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि निफ्टी इंडेक्स वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित मुनाफे के लगभग 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप और एनएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 28 और 24 गुना पर कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में यह बाजार समझदार और चुस्त निवेशकों के लिए अच्छा मौका बन गया है.