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22 साल बाद कश्मीर में मिला मध्य प्रदेश का ‘दिनेश’, फाइल हो चुकी थी बंद, जानें कैसे हुआ चमत्कार

राजगढ़: मध्य प्रदेश के राजगढ़ से 22 साल पहले लापता हुआ शख्स जम्मू कश्मीर में मिल गया है. सबांसड़ा गांव से जब दिनेश (बदला हुआ नाम) लापता हुआ तब उसकी उम्र 22 वर्ष थी. उसे ढूंढने के लिए परिवार ने 2 साल तक प्रयास किया, लेकिन उन्हें दिनेश को खोजने में सफलता नहीं मिली. दिनेश की पत्नी हर दिन अपने पति का इन्तजार करते करते थक चुकी थी. जब दिनेश गुम हुआ तब उसका 2 वर्ष का बेटा दीपक उस समय बहुत छोटा था, तो उसे इतना समझ नहीं आया कि अचानक मेरे पिता कहां चले गए.

8 दिन पहले आई दिनेश की खबर
टेलरिंग का कार्य करने वाले दिनेश के घर से कहीं चले जाने से उनकी पत्नी को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ा. जब आज से 8 दिन पहले कश्मीर से दिनेश के मिलने की सूचना आती है तब सब आश्चर्य चकित रह गए. लेकिन अब उनकी उम्र 22 वर्ष नहीं बल्कि 44 वर्ष हो चुकी थी. क्योंकि जब ये घर गए तब इनकी उम्र 22 वर्ष थी ओर उनका 2 वर्ष का बेटा दीपक अब 24 वर्ष का हो चुका है. जहां उसकी भी शादी हो चुकी है.

ऐसे मिली सुरेंद्र की सूचना
22 साल का दिनेश जब अपने घर से बिना किसी को बताए निकला था तब उसकी दिमागी हालत सही नहीं थी, जिसके कारण भटकते हुए कश्मीर पहुंच गया. वर्ष 2004 के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में फोन की सुविधा न होने के कारण दिनेश से किसी प्रकार का संपर्क परिवार वाले नहीं कर पाए. जहां समय बीतने लगा वहीं परिवार की उम्मीद भी अब सुरेंद्र को खोजने की खत्म होने लगी. वर्तमान समय में परिवार उसे भूल भी चुका था.

जब दिनेश कश्मीर के कुपवाड़ा में पहुंचा तो वहां की पुलिस ने उसकी दिमागी हालत को देखते हुए उसे वर्ष 2025 में मेंटल हॉस्पिटल श्रीनगर भेज दिया गया, ताकि उसकी दिमागी हालत को सही किया जा सके. श्रीनगर मेंटल हॉस्पिटल में डॉक्टर मारिया जहूर जो कि एक मानसिक रोगी विशेषज्ञ हैं, इनके साथ ही सज्जाद उर रहमान बट्ट जो इसी हॉस्पिटल में मानसिक रोगी विशेषज्ञ होने के साथ ही एक समाजसेवी भी हैं, उन्होंने दिनेश का इलाज किया.

जैसे जैसे दिनेश की मानसिक स्थिति में सुधार होने लगा तो दोनों ही डॉक्टरों को पता चला कि ये मध्य प्रदेश का रहने वाला है. फिर कुपवाड़ा पुलिस ने मध्य प्रदेश के खिलचीपुर स्थित भोजपुर थाना में संपर्क कर दिनेश के बताए पते पर संपर्क किया तो राजगढ़ के सवांसड़ा गांव से भोजपुर पुलिस ने इनके परिजन को बुलाकर श्रीनगर मेंटल हॉस्पिटल से वीडियो कॉल पर पहचाना करवाई. जो कि आज से 10 दिन पूर्व ही सुरेंद्र का परिवार को पता चल सका.

ऐसे मिली कश्मीर पहुंचने में मदद
दिनेश को घर कैसे लेकर आया जाए इसको लेकर परिवार वाले चिंतित थे. क्योंकि कश्मीर जैसी जगह पर पहुंचना उनके लिए संभव नहीं था. विश्वकर्मा परिवार अपने परिचित लल्लू बना से मिला. जहां से उन्हें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह से चर्चा करने की सलाह मिली. फिर लल्लू बना, मोतीलाल, पिंटू सोंधीया और रंजीत भिलाला पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मिलने उनके निवास दिल्ली पहुंचे. जहां उन्होंने पूरी बात बताई. फिर कश्मीर में संपर्क कर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दिनेश को वापस लेकर आने के लिए कश्मीर सरकार और श्रीनगर मेंटल हॉस्पिटल के डॉक्टरों से बातचीत की.

कश्मीर से 22 साल बाद 44 का होकर लौटा दिनेश
14 जनवरी 2026 की रात जब दिनेश वापस अपने घर राजगढ़ जिले के सवांसड़ा गांव पहुंचा तो सब उसके इंतजार में बैठे थे. उसका बेटा दीपक, उसकी पत्नी, उसका साला मोहन और उसके ससुर उन सभी की आंखें खुशी से नम हो चुकी थी. दिनेश के साले मोहन ने बताया कि, ”हमने जीजा जी को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन हमें कोई सफलता नहीं मिली. हम उम्मीद छोड़ चुके थे.”

वहीं दिनेश के बेटे दीपक ने बताया कि, ”जब पापा घर से गए थे तब में महज 2 साल का था. आज मेरी उम्र 24 साल की है और मेरी भी शादी हो चुकी है. लेकिन उस समय मेरी आँखें मेरे पापा के घर आने का रास्ता देखती थी. जैसे जैसे में बड़ा होता गया तो मुझे पता चला कि अब मेरे पापा लौटकर कभी नहीं आयेंगे.”

दिनेश की पत्नी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि, ”इनके चले जाने के बाद मैंने किस तरह इनके घर वापस आने का इंतजार किया है ये में ही जानती हूं”
सुरेंद्र के ससुर ने कहा कि, ”हमने इन्हें कहां कहां नहीं ढूंढा लेकिन जब ये नहीं मिले तो हमने भी हार मान ली और मुझे लगा कि अब ये इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन जब इनकी सूचना मिली तो फिर एक उम्मीद की नई किरण जागी और जब घर वापस आए तो मेरी जान में जान आई.”