ब्रेकिंग
Usri River Body Found: मुफ्फसिल थाना क्षेत्र का मामला, एसआईटी और खोजी कुत्ते की मदद से हो रही थी तला... Palamu Murder Case: चर्चित प्रभात मेहता हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी गठित, आईपीएस दिव्यांशु शुक्ल... Jharkhand Ration Dealers News: कमीशन बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किलो करने की मांग, सर्वर समस्या से परेशान ... Pregnant Woman Murder Case: पाटन थाना क्षेत्र के रानीताल पुलिया की घटना, पुलिस ने तीन आरोपियों को कि... Madhya Pradesh Crime & Accident: जिला अस्पताल में घायलों का चल रहा इलाज, पुलिस पेट्रोलिंग टीम की सूझ... Madhya Pradesh Police Action: सीसीटीवी फुटेज आया सामने, जमीन विवाद के चलते ज्योति चौरसिया की हत्या क... Kranti Gaud Bageshwar Dham: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गोल्ड मेडलिस्ट क्रिकेटर को दी बधाई, घुव... Amit Shah Minute-to-Minute Schedule: स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण और डेयरी प्रोडक्ट्स प्लां... MP Politics: "हम दो, हमारे पांच" का नारा देकर सुर्खियों में आए खरगोन-बड़वानी सांसद, जिम की जगह अखाड़... Madhya Pradesh Coal Mines: उमरिया कालरी के इतिहास और रोजगार पर मंडराए संकट को लेकर उग्र हुआ आंदोलन

एमपी के इस जिले में बना टाइटैनिक जहाज जैसा मंदिर! देखकर आप भी हो जाएंगे कारीगरी के मुरीद, जानें इसकी क्या है खासियत

मंदसौर। वैसे तो आपने भारत में और मध्य प्रदेश ऐसे कई मंदिर देखे होंगे लेकिन हम आपको ऐसे मंदिर के दर्शन करवाते हैं जो जहाज मंदिर के नाम से ही प्रसिद्द है। मध्य प्रदेश में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी ऐतिहासिकता के लिए जाने जाते हैं। ऐसे ही हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो जहाज जैसा बना हुआ है!

जी हां मध्य प्रदेश में ऐसा पहला मंदिर बना है जिसे जहाज मंदिर कहते हैं मंदसौर जिले से महज 40 किलो मिटर की दूरी सीतामऊ में प्रदेश का पहला जहाज मंदिर है जो यहां आने जाने वाले समय में यह मंदिर जैन तीर्थक्षेत्र के रूप में उभरेगा ये मंदिर को तैयार होने में करीब 17 साल पूरे लगे हैं। इस मंदिर को पूरा बनाने में राजस्थान के 20 से अधिक कारीगरों की देखरेख में सैकड़ों मजदूरों ने इसे जहाज की आकृति दी है। जहाज भी धरती पर नहीं बल्कि कमल के फूल में विराजमान है।

कितने समय में हुआ मंदिर का निर्माण

मार्बल से बने इस मंदिर को बनाने में 17 साल का समय लगा और 20 से अधिक कारीगर ने इसे बनाया है। इस जहाज मंदिर की चौड़ाई 36 फीट है, जबकि मंदिर की लंबाई 110 फीट है और ऊंचाई 80 फीट है। प्रारंभ हुआ निर्माण जहाज मंदिर का निर्माण करीब 2008 में प्रारंभ हुआ था। राजस्थान के जालौर के बाद ये दूसरा मंदिर है मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के सीतामऊ तहसील लदुना रोड़ पर!

चंबल से निकली प्रतिमा

पुजारी रमेश चंद्र जैन ने बताया कि यहां मूल नायक आदिनाथ भगवान है और नीचे नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान है वो चंबल नदी में से प्रतिमा निकली हुई हैं और 03 हजार वर्ष पुरानी है बहुत चमत्कारी मूर्ति है और इसकी जो डिजाइन है जहाज के हिसाब से दे रखी अपने इंडिया में दो ही मंदिर हैं एक जालौर के पास में मंदिर है और दूसरा मंदसौर के सीतामऊ में इस मंदिर को पूरा बनाने में 17 साल लग गए और आयोजन में जैन समाज की नवकारशी होती है जो भी मंदसौर राज स्थान सहित उदय पुर तक के लोग पहुंचते है!