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हिमाचल से लद्दाख तक रेल नेटवर्क, 1.31 लाख करोड़ की लागत से बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन

नई दिल्ली: भारत में रेलवे नेटवर्क का दायरा अब हिमालय के बेहद ऊंचे, बर्फीले और दुर्गम इलाकों तक फैलाने की ऐतिहासिक तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार की इस अत्यंत महत्वाकांक्षी ‘बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन’ परियोजना के पूरा होने के बाद देश के रेलवे इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ जाएगा। इस विशाल प्रोजेक्ट के तहत लगभग 489 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण किया जाएगा, जिसमें से करीब 270 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह से पहाड़ों के भीतर सुरंगों से होकर गुजरेगा। इस रूट पर तंगलंग ला दर्रे के नीचे समुद्र तल से लगभग 5,256 मीटर की ऊंचाई पर एक भव्य रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है, जो भविष्य में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन साबित हो सकता है।

1.31 लाख करोड़ रुपये की लागत वाला यह मेगा प्रोजेक्ट सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से भी है बेहद महत्वपूर्ण

रेलवे मंत्रालय इस वृहद परियोजना के लिए अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार कर चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे महत्वाकांक्षी कार्य पर लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। यह सिर्फ एक सामान्य यात्री रेल मार्ग नहीं है, बल्कि देश के रक्षा मंत्रालय की रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी इसे प्रमुखता से शामिल किया गया है। लद्दाख जैसे संवेदनशील और ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र तक हर मौसम में सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के लिहाज से यह रेल कॉरिडोर मील का पत्थर साबित होगा।

बिलासपुर से लेह तक का रूट, कई महत्वपूर्ण शहरों और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा यह ब्रॉडगेज कॉरिडोर

प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह ब्रॉडगेज रेल लाइन हिमाचल प्रदेश को सीधे तौर पर लद्दाख क्षेत्र के साथ जोड़ेगी। इस 489 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग का सफर कई प्रमुख कस्बों, शहरों और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरेगा, जिनमें मुख्य रूप से बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, मनाली, सिस्सू, दारचा, केलांग, सरचू, पांग, रुमत्से, उपशी और खारू जैसे स्थान शामिल हैं। इस पूरी रेल लाइन का अंतिम और समापन स्टेशन ऐतिहासिक शहर लेह होगा। हिमालय के इन दुर्गम इलाकों में भू-भाग बेहद कठिन है, जहाँ गहरी खाइयों, ऊंचे पहाड़ों और अत्यधिक बर्फबारी के कारण निर्माण कार्य करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

चीन का रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी, तंगलंग ला दर्रे के नीचे 5,256 मीटर की ऊंचाई पर प्रस्तावित है यह अनोखा रेलवे स्टेशन

इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण तंगलंग ला दर्रे के नीचे बनने वाला रेलवे स्टेशन है। इसे समुद्र तल से करीब 5,256 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। यदि यह प्रोजेक्ट तय डिजाइन के अनुसार धरातल पर उतरता है, तो भारत चीन के मौजूदा रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा। वर्तमान में दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशन का खिताब चीन के ‘तांगगुला रेलवे स्टेशन’ के पास है, जो छिंगहाई-तिब्बत रेल लाइन पर लगभग 5,068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भारत में बनने वाला यह नया स्टेशन उससे भी लगभग 188 मीटर अधिक ऊंचाई पर होगा, जो इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना होगा।

आधे से अधिक रास्ता सुरंगों के अंदर से गुजरेगा, 270 किलोमीटर लंबे टनल निर्माण से पूरी होगी यह चुनौती

बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन की एक और बड़ी तकनीकी विशेषता इसमें बनने वाली विशाल सुरंगें हैं। इस 489 किलोमीटर के सफर में लगभग 270 किलोमीटर का मार्ग सुरंगों (Tunnels) के भीतर से तय किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस रेल लाइन का आधे से ज्यादा हिस्सा पहाड़ों के गर्भ से होकर निकलेगा। हिमालय की जटिल चट्टानों की बनावट, भूस्खलन की आशंका, अंदरूनी जलस्रोत और अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर परिस्थितियों के बीच इतनी लंबी सुरंगों का निर्माण करना इस प्रोजेक्ट का सबसे खर्चीला और तकनीकी रूप से सबसे कठिन चरण माना जा रहा है।

रक्षा जरूरतों और बारहमासी कनेक्टिविटी के लिए क्यों जरूरी है यह रेल लाइन?

वर्तमान में लद्दाख क्षेत्र तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से सड़क मार्ग और हवाई यातायात पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मनाली-लेह हाईवे इस क्षेत्र की मुख्य जीवन रेखा है, लेकिन सर्दियों के दिनों में भारी बर्फबारी और खराब मौसम के चलते यह सड़क मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, जिससे आवापजाही पूरी तरह बाधित हो जाती है। ऐसे में रेलवे लाइन के शुरू हो जाने से न केवल आम यात्रियों को सुरक्षित सफर का विकल्प मिलेगा, बल्कि सेना के भारी साजो-सामान, हथियार और जरूरी रसद सामग्री को बिना किसी बाधा के सीधे लद्दाख तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।