ब्रेकिंग
Madhya Pradesh Toll Plaza News: एमपी के 149 टोल प्लाजा होंगे डिजिटल नेटवर्क से लैस, भोपाल मुख्यालय स... Shahdol Tiger Attack: शहडोल में गाय ढूंढने जंगल गए ग्रामीण पर टाइगर ने किया हमला, दर्दनाक मौत से गां... Madhya Pradesh News: सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम, बालाघाट के 100 नक्सल प्रभावित गांवों के विकास के लि... Shivpuri Crime News: शिवपुरी में दिल दहला देने वाली घटना, दो सगी बहनों ने अपने बच्चों के साथ कुएं मे... Haryana Weather Update: चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का हरियाणा में असर, 15 जिलों में बारिश, आंधी और ओलावृ... Gurgaon Accident News: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, बस में पीछे से घुसी तेज रफ्ता... Faridabad News: पंजाब में हैंड ग्रेनेड हमले का आरोपी फरीदाबाद से गिरफ्तार, ISI और आतंकी शहजाद भट्टी ... Army Gunner Firing in Jind: पत्नी से विवाद के बाद ससुराल पहुंचे फौजी ने चलाईं 6-7 गोलियां, पुलिस ने ... Haryana Vehicle Registration Boom: हरियाणा की सड़कों पर दौड़ पड़े 46 लाख से ज्यादा नए वाहन, गुरुग्रा... Haryana Government Employees Hike: त्योहारी सीजन से पहले हरियाणा कौशल रोजगार निगम के 1.15 लाख कर्मचा...

Supreme Court on Transgender Rights and Women Reservation: ट्रांसजेंडर अधिकारों और महिलाओं के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र से मांगा गया जवाब

नई दिल्ली: ट्रांसजेंडर समुदाय के मानवीय अधिकारों और महिलाओं को संविधान प्रदत्त कानूनी सुरक्षा तथा आरक्षण के संरक्षण को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में एक महत्वपूर्ण मामला पहुंच गया है। महिलाओं के अधिकारों से जुड़े एक संगठन ने शीर्ष अदालत में जनहित याचिका (PIL) दायर करते हुए यह मांग उठाई है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उनके कानूनी अधिकार और पहचान प्रदान करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि महिलाओं के लिए निर्धारित विशेष आरक्षण, सरकारी सुविधाओं और कानूनी प्रावधानों की पूरी तरह रक्षा हो सके। इस मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यह बात कही गई है कि इन प्रावधानों को व्यावहारिक जमीन पर उतारने में कुछ प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं आ सकती हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की मामले की सुनवाई, विमेन्स डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया ने दाखिल की है PIL

यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2026 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े कानून में किए गए संशोधनों और बदलावों से संबंधित है। ‘विमेन्स डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया’ नामक महिला संगठन द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई है। इस पर सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ द्वारा की जा रही है। अदालत ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ताओं की दलील: ‘ट्रांसजेंडर्स को मिलें समान अधिकार, लेकिन महिलाओं के लिए तय आरक्षित सीटों पर न हो असर’

याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने अदालत को बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय को उनके सभी अधिकार और समानता अवश्य मिलनी चाहिए, परंतु इसके कारण संविधान और विभिन्न कानूनों के तहत महिलाओं के लिए आरक्षित की गई विशेष सुविधाओं और अधिकारों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का उदाहरण देते हुए मुख्य सवाल उठाया कि क्या ट्रांसजेंडर महिलाएं भी महिलाओं के लिए आरक्षित इन सीटों पर अपना दावा पेश कर सकती हैं? संगठन का मुख्य जोर इस बात पर है कि ट्रांसजेंडर अधिकारों और महिलाओं के लिए आरक्षित विशेष प्रावधानों के बीच की कानूनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए।

जेल की व्यवस्था, खेल स्पर्धाओं और गिरफ्तारी से जुड़े नियमों पर भी उठे गंभीर सवाल

इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष कई व्यावहारिक और संवेदनशील बिंदु रखे। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) में पहले से ही यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या जैविक रूप से पुरुष से महिला बनीं ट्रांसजेंडर्स को महिलाओं की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। इसके अलावा, महिला जेलों में रखने की व्यवस्था, सूर्यास्त के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े विशेष कानूनी संरक्षण, शारीरिक तलाशी के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की अनिवार्य उपस्थिति और सार्वजनिक महिला शौचालयों के इस्तेमाल जैसे गंभीर विषयों पर भी कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया है।

वर्ष 2026 के कानून में संशोधन को दी गई है चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में अभी अंतिम फैसला आना बाकी

गौरतलब है कि ट्रांसजेंडर अधिकार कानून में वर्ष 2026 के दौरान किए गए संशोधनों को इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में अलग से चुनौती दी गई है। उन पुरानी याचिकाओं में यह तर्क दिया गया था कि नए बदलाव ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान को स्वतंत्र रूप से मान्यता देने के अधिकार को सीमित कर सकते हैं। अब महिलाओं के इस संगठन द्वारा दायर की गई नई याचिका को भी इन्हीं मामलों के साथ संलग्न कर दिया गया है। फिलहाल, सर्वोच्च अदालत ने इन सभी संवेदनशील सवालों पर अभी तक कोई अंतिम फैसला या आदेश पारित नहीं किया है। मामले में केंद्र सरकार की तरफ से औपचारिक जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही आगे की विस्तृत सुनवाई की जाएगी।