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जबलपुर का ऐतिहासिक ‘बैलेंस रॉक’ खतरे में? प्राकृतिक धरोहर के पास निर्माण पर उठे सवाल

जबलपुर: नर्मदा नदी, धुआंधार जलप्रपात और संगमरमर की पहाड़ियों तक जबलपुर की पहचान सीमित नहीं है। शहर में प्रकृति की एक ऐसी अनोखी संरचना भी है, जिसे देखने के लिए देशभर से पर्यटक पहुंचते हैं। मदन महल किले के पास मदन महल पहाड़ी पर मौजूद बैलेंस रॉक प्रकृति की अद्भुत भूगर्भीय संरचना है। अब इस प्राकृतिक धरोहर के आसपास जमीनों के निजी हाथों में पहुंचने और निर्माण कार्य होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

🌍 बैलेंस रॉक देखने देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक

बैलेंस रॉक में एक विशाल गोलाकार चट्टान दूसरी चट्टान के ऊपर इस तरह टिकी हुई है, मानो जरा-सा संतुलन बिगड़ते ही नीचे गिर जाएगी। इसके बावजूद यह संरचना लंबे समय से अपने स्थान पर कायम है। प्रकृति की इस अनोखी कलाकारी को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक जबलपुर पहुंचते हैं। इन दिनों पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत से आए पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं।

⛰️ पहाड़ों और चट्टानों से बनी जबलपुर की पहचान

जबलपुर का नाम स्थानीय मान्यताओं में जाबालि ऋषि से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, अरबी भाषा में ‘जबल’ का अर्थ पहाड़ होता है। हालांकि, जबलपुर के नाम की वास्तविक ऐतिहासिक उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। भौगोलिक नजरिए से देखें तो पहाड़ियों और चट्टानों की मौजूदगी ही इस शहर की विशिष्ट पहचान है। भेड़ाघाट की सफेद संगमरमर की चट्टानें और मदन महल की चट्टानी संरचनाएं जबलपुर के भूगर्भीय इतिहास की झलक दिखाती हैं। क्षेत्र की चट्टानें लंबे समय में हुई भूगर्भीय प्रक्रियाओं और प्राकृतिक अपक्षय का परिणाम हैं। बारिश, हवा और तापमान में बदलाव जैसी प्रक्रियाओं ने हजारों वर्षों में चट्टानों की सतह और आकार को प्रभावित किया है। बैलेंस रॉक इसी प्राकृतिक प्रक्रिया से बनी एक विशिष्ट संरचना है।

🏗️ बैलेंस रॉक के ठीक पीछे निर्माण

स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि मदन महल पहाड़ी का बड़ा हिस्सा कभी प्राकृतिक जंगल से घिरा हुआ था। यहां मदन महल का ऐतिहासिक किला मौजूद है और उसके आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक स्वरूप में था। उनका सवाल है कि जिस पहाड़ी और उसके आसपास की जमीन को सरकारी संरक्षण में होना चाहिए था, वहां जमीनों का स्वामित्व कैसे बदलता गया। इस विवाद ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब बैलेंस रॉक से महज 20 फीट की दूरी पर एक इमारत का निर्माण हो गया। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने इसे प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए आपत्ति जताई है। वरिष्ठ नागरिक डॉ. पी जी नाज पांडे का आरोप है, “दस्तावेजों में हेरफेर के जरिए सरकारी जमीन निजी हाथों में पहुंचाई गई।” उनका दावा है कि बैलेंस रॉक के आसपास अब आधा एकड़ से भी कम सरकारी जमीन बची है, जबकि बाकी जमीन निजी हाथों में चली गई है। इन आरोपों की पुष्टि जमीनों के राजस्व अभिलेखों और हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

🏢 पर्यटन विभाग पहुंचकर जताया विरोध

बैलेंस रॉक के संरक्षण की मांग को लेकर जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के सदस्य और अन्य सेवानिवृत्त नागरिक पर्यटन विभाग पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने इस प्राकृतिक धरोहर के आसपास हो रहे निर्माण और जमीनों के स्वामित्व में हुए बदलाव का मुद्दा उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बैलेंस रॉक जबलपुर की पर्यटन पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस धरोहर के संरक्षण के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी जरूरी है।

📋 पर्यटन विभाग ने बताई अपनी भूमिका

जबलपुर पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन कुमार शर्मा के मुताबिक, “इस क्षेत्र की जमीन पुरातत्व विभाग के पास है। पर्यटन विभाग का काम मुख्य रूप से पर्यटन स्थल का प्रचार-प्रसार करना है। जमीनों की खरीद-बिक्री रोकना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह काम संबंधित प्रशासनिक विभागों का है।”

⚖️ अपर कलेक्टर ने शुरू की जांच

सामाजिक संगठनों और नागरिकों की ओर से लगातार आपत्तियां उठाए जाने के बाद जबलपुर के अपर कलेक्टर रविशंकर राय ने मामले की जांच शुरू की है। उनके मुताबिक, “प्रशासन यह पता लगा रहा है कि संबंधित जमीनों का हस्तांतरण किन दस्तावेजों और किन आधारों पर हुआ। जांच में जमीनों के पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड, स्वामित्व परिवर्तन तथा संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीनों का हस्तांतरण नियमानुसार हुआ या इसमें किसी तरह की अनियमितता हुई है।”

💎 ऐसी धरोहर दोबारा नहीं बनाई जा सकती

बैलेंस रॉक सिर्फ चट्टानों का समूह नहीं, बल्कि जबलपुर की प्राकृतिक और पर्यटन पहचान का हिस्सा है। किसी निर्माण या मानवीय गतिविधि से इस संरचना को नुकसान पहुंचता है, तो उसे पहले जैसी स्थिति में लौटाना संभव नहीं होगा।