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Criminal Parole Jharkhand: कुख्यात अपराधियों को बड़ा झटका, राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद ने खारिज किए रिहाई के प्रस्ताव

झारखंड की जेलों में बंद सजायाफ्ता और कुख्यात अपराधियों की समय से पहले रिहाई को लेकर राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। हत्या, जेल के अंदर कैदी की हत्या और फिरौती के लिए दोहरे हत्याकांड जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त अपराधियों को बड़ी राहत नहीं मिली है। राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद (State Sentence Review Board) की बैठक के बाद कुल 53 कैदियों के समयपूर्व रिहाई के प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अधिसूचना के अनुसार इन मामलों में अपराध की गंभीरता, पुलिस की रिपोर्ट और रिहाई के बाद गैंगवार व कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को मुख्य आधार बनाया गया है।

🏛️ अपराध जगत के चर्चित चेहरों को नहीं मिली राहत: वासेपुर के फहीम खान से लेकर अनिल शर्मा तक के प्रस्ताव रद्द

इस सूची में कई बड़े और चर्चित अपराधियों के नाम शामिल हैं, जिनके प्रस्तावों को बोर्ड ने नामंजूर कर दिया है। धनबाद के वासेपुर निवासी और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान को सगीर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिली थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी। पुलिस और जेल प्रशासन की नकारात्मक रिपोर्ट के चलते उनकी रिहाई का प्रस्ताव खारिज किया गया। इसी तरह, रांची जेल के भीतर एक अन्य कैदी की हत्या करने और पूर्व में न्यायिक हिरासत से फरार होने वाले अनिल शर्मा तथा फिरौती के लिए दोहरे हत्याकांड के दोषी सुरेंद्र बंगाली उर्फ सुरेंद्र सिंह रोतेला के मामलों में भी अपराध की प्रकृति को देखते हुए रिहाई की अनुमति नहीं दी गई।

🚫 पुलिस और जेल प्रशासन की रिपोर्ट बनी मुख्य आधार: गैंगवार और सार्वजनिक शांति का खतरा

इन प्रस्तावों पर निर्णय लेते समय केवल सजा की अवधि या उम्र को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक, प्रोबेशन अधिकारी और अदालत के निष्कर्षों को पूरी प्राथमिकता दी गई। लोहरदगा में अपनी बड़ी मौसी की हत्या के दोषी नवल साहू सहित अन्य मामलों में भी बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जघन्य अपराधों में संलिप्त और रिहाई के बाद समाज में दोबारा अपराध या गैंगवार भड़कने की आशंका वाले कैदियों को समयपूर्व रिहाई का लाभ नहीं दिया जा सकता है। सरकार के इस सख्त फैसले से प्रशासनिक हलकों में यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।