MPSC Protest Ends: महाराष्ट्र में MPSC अभ्यर्थियों का 10 दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन, न्यायिक जांच समिति का हुआ गठन
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर पिछले 10 दिनों से पुणे में उग्र प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन रविवार देर रात आखिरकार समाप्त हो गया। राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय न्यायिक समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच प्रक्रिया पूरी होने तक अपने पद से छुट्टी पर जाने की घोषणा की है, जिसके बाद छात्रों ने फिलहाल अपना धरना-प्रदर्शन वापस ले लिया है।
🔍 तुकाराम मुंढे बने जांच समिति के सचिव: कई वरिष्ठ अधिकारियों को कमेटी में किया गया शामिल
राज्य सरकार द्वारा गठित की गई इस विशेष जांच समिति की अध्यक्षता बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और एफडीए (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे को इस महत्वपूर्ण समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा समिति में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीडी नाइक को भी बतौर सदस्य शामिल किया गया है। यह समिति MPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी।
🤝 सरकार ने मानी अन्य मांगें: तीन साल में 70 हजार पदों पर भर्ती और दर्ज मामलों पर भी बनी सहमति
सरकार के प्रतिनिधिमंडल और मंत्रियों के साथ हुई लंबी चर्चा के बाद छात्रों की कई अन्य मांगों पर भी सहमति बन गई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि आगामी तीन वर्षों में करीब 70 हजार पदों पर नई भर्तियां की जाएंगी तथा जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने पर भी विचार किया जा रहा है। इस समझौते के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि जांच समिति पूरी पारदर्शिता के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।