Dholpur Court Action: धौलपुर कोर्ट की सख्त कार्रवाई, 3 दिन अवैध हिरासत में रखने पर थानाधिकारी और जांच अधिकारी पर केस दर्ज
धौलपुर (राजस्थान): राजस्थान के धौलपुर जिले में पुलिस की मनमानी और लापरवाही के खिलाफ अदालत ने एक बेहद कड़ा और मिसाल कायम करने वाला कदम उठाया है। बाड़ी एसीजेएम कोर्ट ने बाइक चोरी के एक मामले में पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए जांच अधिकारी और थाना प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखे गए मुख्य आरोपी और एक नाबालिग को तुरंत रिहा करने का निर्देश भी दिया गया है। कोर्ट के इस ऐतिहासिक और कड़े रुख से स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
🕒 रात 10 बजे तक चली सुनवाई: तीन दिन से थाने में बंद था आरोपी और उसका पिता
मामले की पृष्ठभूमि और पुलिस की लापरवाही:
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अवैध हिरासत का खुलासा: बाड़ी एसीजेएम कोर्ट संख्या-1 में गुरुवार को रात 10 बजे तक मैराथन सुनवाई चली। इस दौरान यह बात सामने आई कि पुलिस ने बाइक चोरी के एक आरोपी और एक नाबालिग को तीन दिनों तक थाने में अवैध रूप से बंद रखा था और समय पर अदालत में पेश नहीं किया गया था।
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पिता को भी बनाया था बंधक: वकील श्रीराम मंगल ने जानकारी दी कि कोतवाली थाना पुलिस ने सनोरा गांव के 19 वर्षीय आकाश जाटव को बाइक चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि आकाश की गिरफ्तारी से पहले पुलिस उसके पिता रामेश्वर दयाल जाटव को घर से उठाकर थाने ले आई थी और पूरी रात बैठाकर रखा था। जब आकाश ने थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण किया, तब उसके पिता को छोड़ा गया।
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जुर्म कबूलने के बावजूद प्रताड़ना: आरोपी आकाश ने पूछताछ में बाइक चोरी की बात कबूल ली थी और चोरी की गई बाइक भी पुलिस द्वारा बरामद कर ली जा चुकी थी, इसके बावजूद उसे समय पर कोर्ट में पेश करने के बजाय थाने में अवैध रूप से बिठाए रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई।
🚫 मानवीय यातनाओं पर कोर्ट की कड़ी फटकार: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
न्यायालय की तल्ख टिप्पणियां:
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तत्काल रिहाई के आदेश: एसीजेएम डॉ. सिद्धार्थ शंकर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए आरोपियों को तीन दिन तक अवैध हिरासत में रखने, अमानवीय यातनाएं देने और गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध करार दिया। कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से दोनों को रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, नाबालिग को भी मुक्त कर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
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अधिकारियों पर मुकदमे के निर्देश: कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले के जांच अधिकारी (ASI सुरेश चंद्र) और थाना प्रभारी (SHO महेंद्र शर्मा) के खिलाफ झूठे सबूत रचने, कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करने और गलत दस्तावेज लगाने के प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध बनते हैं, इसलिए दोनों पर मुकदमा दर्ज किया जाए।
🔍 उच्चाधिकारियों को विशेष जांच के निर्देश: एसएचओ और एएसआई की कार्यप्रणाली पर सवाल
जांच का दायरा और प्रशासनिक कदम:
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संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना: कोर्ट ने माना कि पुलिस अधिकारियों द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों और संवैधानिक प्रावधानों की सरासर अवहेलना की गई है।
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उच्च स्तरीय जांच: इस गंभीर मामले में धौलपुर एसपी, आईजी, एडीजी क्राइम, एडीजी विजिलेंस और रेंज आईजी भरतपुर को निर्देशित किया गया है कि वे इस प्रकरण के लिए एक विशेष जांच अधिकारी नियुक्त करें और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर रिपोर्ट सीजेएम कोर्ट में पेश करें।