रायपुर। मानसून की विदाई से ठीक पहले सीमेंट कंपनियों ने नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम दो चरणों में 60 रुपये प्रति बोरी तक बढ़ा दिए हैं। सबसे पहले 24 अगस्त को 40 रुपये और इसके तुरंत बाद 20 रुपये की और बढ़ोतरी की गई। इससे प्रदेश में चल रहे 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी निर्माण कार्यों की कुल लागत बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बारिश के कारण फिलहाल ज्यादातर निर्माण कार्य धीमे चल रहे हैं, लेकिन मानसून खत्म होते ही निर्माण कार्यों में तेजी आने वाली है।
🏠 खुदरा बाजार में भी दाम बढ़ाने की तैयारी: पीएम आवास और सरकारी प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा सीधा असर
ऐसे में सीमेंट की बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर सरकारी परियोजनाओं, ठेकेदारों और गरीबों के लिए बन रहे पीएम आवास (PM Awas Yojana) पर पड़ने की पूरी आशंका है।
नॉन-ट्रेड सीमेंट के बाद अब खुले (खुदरा) बाजार में बिकने वाले सीमेंट के दाम भी करीब 20 रुपये तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
🧱 ओपीसी (OPC) सीमेंट के रेट ₹90 तक उछले: फ्लाईओवर और बड़े पुलों का निर्माण होगा महंगा
सरकारी निर्माण कार्यों में पीपीसी (PPC) के साथ-साथ ओपीसी (OPC) सीमेंट का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
ओपीसी के दाम पहले करीब 270 रुपये प्रति बोरी थे, जो अब बढ़कर 360 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गए हैं। ओपीसी में फ्लाईएश नहीं मिलाया जाता, जबकि पीपीसी में फ्लाईएश का उपयोग होता है। बड़े भवनों, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और पुल जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में ओपीसी सीमेंट का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।
🛒 खुदरा एवं थोक बाजार का हाल: मांग कमजोर होने के बावजूद बढ़ीं कीमतें
नॉन-ट्रेड सीमेंट के बाद अब कंपनियां खुले बाजार के सीमेंट के दाम भी बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
वर्तमान में थोक बाजार में सीमेंट करीब 230 से 270 रुपये और खुदरा बाजार में 240 से 280 रुपये प्रति बोरी मिल रहा है। कारोबारी विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के कारण फिलहाल सीमेंट की मांग कमजोर है और केवल अति-आवश्यक निर्माण कार्य ही चल रहे हैं। इसके बावजूद कीमतें बढ़ने से कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर भारी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
🏢 प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं की बढ़ेगी लागत: नवा रायपुर, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बजट पर असर
छत्तीसगढ़ प्रदेश में नवा रायपुर स्थित राजभवन सहित एनआरडीए (NRDA) की करीब 700 से 800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
इसके अलावा, अंबेडकर अस्पताल में चार बड़ी इमारतों का निर्माण चल रहा है और पांच नए मेडिकल कॉलेजों के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम जारी है। प्रदेशभर में पीएम आवास और कंक्रीट सड़कों की हजारों करोड़ रुपये की योजनाएं भी चल रही हैं। बारिश थमने के बाद जब इन परियोजनाओं में काम गति पकड़ेगा, तब सीमेंट की बढ़ी हुई कीमत का असर सीधे कुल लागत पर दिखाई देगा। पुराने स्वीकृत कार्यों में ठेकेदारों के सामने भारी अतिरिक्त वित्तीय दबाव की स्थिति बन सकती है।
📉 30 प्रतिशत तक बढ़ी सीमेंट की कीमत: बिल्डर एसोसिएशन ने जताई चिंता
बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया की छत्तीसगढ़ शाखा के प्रदेश अध्यक्ष रूपेश सिंघल के अनुसार, नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम में 60 रुपये की वृद्धि दर असल करीब 30 प्रतिशत तक की सीधी बढ़ोतरी है।
उनके मुताबिक, इसका बहुत बुरा असर सरकारी योजनाओं की कुल बजट लागत पर पड़ेगा और बढ़ी हुई दरों के कारण ठेकेदारों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।