Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद में 80 वर्षीय बुजुर्ग ने बेटे के साथ मिलकर की पोते की हत्या, लाठी और गमछा बरामद; पढ़ें खौफनाक वारदात
गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (नंदग्राम क्षेत्र) में दो दिन पहले हुए अश्वनी उर्फ आशु की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
अश्वनी की हत्या किसी बाहरी या अज्ञात हमलावर ने नहीं, बल्कि उसके अपने ही 80 वर्षीय दादा भीम सिंह और सगे चाचा राजेश ने मिलकर की थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल लाठी, गला घोंटने में प्रयुक्त गमछा और एक धारदार हथियार भी बरामद कर लिया गया है।
🍷 रोज-रोज की शराब और मारपीट से तंग आ चुके थे परिजन: दादा ने सुनाई प्रताड़ना की कहानी
पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में आरोपी दादा भीम सिंह ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी वजह बताई।
भीम सिंह ने बताया कि पोता अश्वनी अत्यधिक शराब पीने का आदी हो चुका था और हर दिन शराब खरीदने के लिए उनसे पैसों की मांग करता था। पैसे देने से मना करने पर वह बुजुर्ग दादा के साथ गाली-गलौज और मारपीट करता था। रोज-रोज के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से दुखी होकर दादा भीम सिंह ने अपने छोटे बेटे राजेश के साथ मिलकर उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दे दिया।
💰 2.5 लाख रुपये छीने और बेच दिया मोबाइल: हापुड़ के पैतृक मकान की बिक्री से जुड़ा था मामला
एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतक अश्वनी नंदग्राम थाना क्षेत्र के नूर नगर सिहानी में अपने दादा के साथ रहता था।
उसकी हरकतों और मारपीट से तंग आकर उसके माता-पिता पहले ही उससे अलग होकर किराए के मकान में रहने लगे थे। मूल रूप से हापुड़ के रहने वाले भीम सिंह ने अपनी पैतृक जमीन और मकान का एक हिस्सा नौ लाख रुपये में बेचा था। कर्ज चुकाने के बाद बचे ढाई लाख रुपये अश्वनी जबरन उनसे छीन ले गया था। इसके बाद भी 10 सितंबर को जब उसे पैसे नहीं मिले, तो उसने दादा का मोबाइल फोन छीनकर बेच दिया और उन पैसों से शराब पी गया।
💊 शराब में पिलाई नींद की गोली, फिर सोते समय गमछे से घोंटा गला
एसीपी जियाउद्दीन के मुताबिक, 12 सितंबर की रात अश्वनी फिर से नशे की हालत में घर पहुंचा और दादा से पैसे मांगने लगा।
इस बार दादा भीम सिंह ने पैसे देने के बजाय चालाकी से शराब में नींद की गोलियां मिलाकर उसे पीने के लिए दे दीं। अत्यधिक नशे और नींद की गोलियों के असर से अश्वनी छत पर जाकर गहरी नींद में सो गया। जब वह पूरी तरह बेसुध हो गया, तो भीम सिंह और राजेश ने छत पर जाकर गमछे से उसका गला घोंट दिया और लाठी से भी हमला किया।
🚔 शव ठिकाने लगाने में नाकाम रहने पर रची झूठी कहानी: पुलिस ने खोला सच
हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपियों ने आधी रात को शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की, लेकिन आसपास लोगों की चहल-पहल और असफलता के डर से वे घबरा गए।
इसके बाद खुद को बचाने के लिए उन्होंने पुलिस को फर्जी सूचना दी और अज्ञात अपराधियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आगे दादा-चाचा का झूठ ज्यादा देर नहीं टिक सका और पुलिस ने पूरे मर्डर केस की गुत्थी सुलझा ली।