सिंधिया राजघराने के 41 हजार करोड़ के संपत्ति विवाद में नया मोड़: प्रतिमा देवी की आपत्ति कोर्ट में स्वीकार
ग्वालियर (मध्य प्रदेश): सिंधिया राजपरिवार की अकूत संपत्ति के बंटवारे से जुड़े दशकों पुराने विवाद में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ (स्व. पद्मराजे राणा) की पुत्री प्रतिमा देवी द्वारा ‘आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट’ से अलग रखे जाने के खिलाफ दाखिल की गई आपत्ति याचिका को ग्वालियर न्यायालय ने विधिवत स्वीकार कर लिया है। अदालत के इस अहम आदेश के बाद अब प्रतिमा देवी भी राजघराने की इस बहुचर्चित और विशाल संपत्ति में अपना कानूनी दावा प्रस्तुत कर सकेंगी। इससे पूर्व उन्हें इस समझौते की प्रक्रिया से अलग रखा गया था, जिस पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया था।
📜 ‘एक्स पार्टी’ बताकर समझौते से किया गया था बाहर: 41 हजार करोड़ की विरासत पर फंसा पेच
पारिवारिक दावे और समझौते की पृष्ठभूमि:
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आपसी सहमति से बंटवारे की प्रक्रिया: सिंधिया राजपरिवार की लगभग 41 हजार करोड़ रुपये की विशाल संपत्ति का बंटवारा अदालत के परामर्श पर आपसी सहमति (आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट) से किए जाने की तैयारी चल रही थी।
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प्रमुख दावेदार: इस समझौते में राजपरिवार के मुखिया केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा उनकी तीन बुआएं—उषा राजे, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया मुख्य पक्षकार के रूप में शामिल हैं।
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बड़ी बुआ के बच्चों की उपेक्षा: समझौते के प्रारूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया की सबसे बड़ी बुआ स्वर्गीय पद्मराजे राणा के वारिसों को ‘एक्स पार्टी’ (एकतरफा गैर-हाजिर) घोषित कर बाहर कर दिया गया था। इसके खिलाफ उनकी पुत्री प्रतिमा देवी ने ग्वालियर जिला अदालत में आपत्ति आवेदन दायर कर न्याय की गुहार लगाई थी।
📮 गलत पते पर भेजे गए थे नोटिस: प्रतिमा देवी ने कोर्ट के समक्ष रखा था अपना पक्ष
पिछली सुनवाई और कानूनी दलीलें:
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25 अगस्त की पेशी: विगत 25 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान प्रतिमा देवी अपनी पुत्री शिवांगी और दामाद प्रतीक कारकी के साथ व्यक्तिगत रूप से ग्वालियर कोर्ट में उपस्थित हुई थीं।
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नोटिस न मिलने का आरोप: उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि उन्हें संपत्ति बंटवारे से संबंधित कोई वैधानिक नोटिस प्राप्त ही नहीं हुआ, क्योंकि संबंधित पक्षकारों द्वारा जानबूझकर नोटिस गलत पते पर भेजे गए थे।
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समान उत्तराधिकार का तर्क: प्रतिमा देवी ने तर्क प्रस्तुत किया कि उनकी माता स्व. पद्मराजे राणा भी महाराजा जीवाजी राव सिंधिया की विधिक पुत्री थीं। इस नाते राजघराने की पैतृक संपत्ति पर उनका भी उतना ही विधिक अधिकार बनता है जितना अन्य संतानों का है। उनकी इस आपत्ति पर तीनों मौसियों और ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पूर्व में जवाब दाखिल किए जा चुके थे।
⚖️ ‘अदालत के न्याय पर पूरा भरोसा’: प्रतिमा देवी के दामाद प्रतीक कारकी ने दी जानकारी
अदालत के ताजा निर्णय का प्रभाव:
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आवेदन हुआ मंजूर: गुरुवार को हुई अहम सुनवाई में प्रतिमा देवी के दामाद प्रतीक कारकी अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने पुष्टि की कि अदालत ने उनकी सास के आपत्ति आवेदन को स्वीकार करते हुए मुख्य वाद का हिस्सा बना लिया है।
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दावे और साक्ष्य रखने का अवसर: न्यायालय के इस निर्णय से अब प्रतिमा देवी को संपत्ति में अपना हिस्सा मांगने, आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना पक्ष मजबूती से रखने का पूरा वैधानिक अवसर प्राप्त होगा। अंतिम फैसले से पूर्व उनका पक्ष सुनना अब अनिवार्य होगा।
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प्रतीक कारकी का बयान: अदालत परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रतीक कारकी ने कहा, “हमें माननीय न्यायालय और उसकी न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है।”
📅 7 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई: दस्तावेजों और आपत्तियों पर होगी बहस
भावी कानूनी कार्यवाही का ब्योरा:
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वकील प्रशांत शर्मा का बयान: सिंधिया राजपरिवार के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत शर्मा ने जानकारी दी कि अदालत ने प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार करते हुए उसे मुख्य सुनवाई में समाहित कर लिया है।
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दस्तावेजों की जांच: मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई आगामी 7 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
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समझौते की वैधता पर मंथन: आगामी सुनवाई के दौरान प्रतिमा देवी की आपत्तियों, वंशावली के कानूनी आधारों और पूर्व में तैयार किए गए ‘आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट’ से जुड़े सभी दस्तावेजों की वैधता पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।