रतनपुर महामाया मंदिर में विहिप और बजरंग दल का उग्र प्रदर्शन: मारपीट मामले में ट्रस्ट को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी
बिलासपुर (छत्तीसगढ़): जिले में रक्षाबंधन की रात दो पक्षों के बीच हुए विवाद का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि धर्मनगरी रतनपुर स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर परिसर में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
दरअसल, 22 अगस्त को मंदिर परिसर में दुकान लगाने वाली एक महिला और कुछ व्यक्तियों के बीच मारपीट की गंभीर घटना घटित हुई थी। इसी विवाद और कथित असामाजिक गतिविधियों के विरोध में हिंदूवादी संगठनों ने एकजुट होकर रैली निकाली और मंदिर प्रांगण में जोरदार प्रदर्शन किया।
📢 ‘मंदिर परिसर में केवल सनातनी व्यापारियों को मिले स्थान’: हिंदूवादी संगठनों का कड़ा रुख
प्रदर्शनकारियों की मांग और बयान:
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पवित्रता की रक्षा: हिंदूवादी संगठन के प्रतिनिधि दुर्गेश ने कहा, “रतनपुर मां भगवती का अति पावन क्षेत्र है और आए दिन असामाजिक तत्व यहां का माहौल खराब और दूषित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी के विरोध में हम सब एकत्रित हुए हैं।”
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स्थानीय सुरक्षा का मुद्दा: उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दिनों मंदिर क्षेत्र में असामाजिक तत्वों द्वारा स्थानीय लोगों के साथ मारपीट की गई।
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व्यापारिक अधिकार: संगठन ने पुरजोर मांग उठाई कि मंदिर परिसर पूरी तरह सनातन धर्म के अनुयायियों का है, इसलिए यहां व्यापार और दुकानों के संचालन में हिंदू भाई-बहनों को ही प्राथमिकता और स्थान दिया जाना चाहिए।
📜 महामाया मंदिर ट्रस्ट को सौंपा ज्ञापन: 4 दिन में विधिक कार्रवाई का मिला आश्वासन
प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट का पक्ष:
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कार्रवाई की मांग: रैली और प्रदर्शन के उपरांत कार्यकर्ताओं ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर मारपीट के दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की।
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ट्रस्ट का बयान: महामाया मंदिर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी अरुण शर्मा ने कहा, “हिंदू संगठन अपनी मांगों को लेकर ट्रस्ट के पास आए थे। उनकी उठाई गई बातों पर पूर्व में भी नोटिस जारी किया गया था। आज प्राप्त ज्ञापन के आधार पर अगले चार दिनों के भीतर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
⚡ दोबारा घटना होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
संगठन की आगामी रणनीति:
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आंदोलन की चेतावनी: विहिप और बजरंग दल के नेताओं ने स्पष्ट रूप से चेताया है कि यदि मंदिर परिसर में असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया गया और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आने वाले दिनों में व्यापक और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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सुरक्षा व्यवस्था: प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिसको देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।