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धमतरी: 10 साल से बिस्तर पर जिंदगी काट रहे शशिकांत ने मांगी इच्छामृत्यु; हमले की CBI जांच और इलाज की CM से गुहार

धमतरी (छत्तीसगढ़): जिले की नगरी तहसील के ग्राम देवपुर निवासी शशिकांत भरत पिछले करीब एक दशक से बिस्तर पर असहाय जिंदगी काटने को विवश हैं।

शशिकांत के अनुसार, 11 नवंबर 2016 को जब वे धमतरी के भटगांव स्थित आईटीआई (ITI) से पढ़ाई कर घर लौट रहे थे, तभी दूकली-गजकन्हार मार्ग पर अज्ञात हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया था। हमले के बाद उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क किनारे छोड़ दिया गया था, जिसके बाद से उनकी पूरी जिंदगी अंधकारमय हो गई।

🦽 हमले के बाद पूरा शरीर हुआ लकवाग्रस्त: आर्थिक तंगी के कारण रुका बेहतर इलाज

शारीरिक स्थिति और पारिवारिक संघर्ष:

  • चलने-फिरने में असमर्थ: उस जानलेवा हमले के बाद से शशिकांत का शरीर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गया। वे स्वयं उठने-बैठने और दैनिक कार्यों के लिए भी असमर्थ हैं और पिछले 10 सालों से बिस्तर ही उनका संसार बन गया है।

  • आर्थिक तंगी: परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वे बड़े और आधुनिक सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में असमर्थ हैं।

  • समय पर इलाज का अभाव: शशिकांत का कहना है कि यदि घटना के तुरंत बाद उन्हें समुचित और उच्चस्तरीय चिकित्सा मिल जाती, तो शायद आज उनका जीवन इस लाचारी में न गुजर रहा होता।

⚖️ 10 साल बाद भी नहीं मिला न्याय: मामले की CBI जांच की मांग

जांच पर सवाल और प्रमुख मांगें:

  • अधूरी जांच का आरोप: शशिकांत ने स्थानीय पुलिस जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि घटना के 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद हमलावरों का कोई सुराग नहीं लग सका और उन्हें न्याय नहीं मिला।

  • सीबीआई जांच की मांग: उन्होंने पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है, ताकि हमले के पीछे के साजिशकर्ताओं और वास्तविक हमलावरों को बेनकाब किया जा सके।

🏛️ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्थानीय प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

प्रशासनिक अपील का विवरण:

  • सीएम से अपील: लगातार शारीरिक पीड़ा और आर्थिक तंगी से जूझ रहे शशिकांत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा और स्थानीय विधायक अंबिका मरकाम से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

  • सरकारी मदद की आवश्यकता: उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था किसी बड़े अस्पताल में सरकारी खर्च पर कराई जाए और कानूनी मदद दी जाए।

💔 ‘इलाज और न्याय नहीं दे सकते तो इच्छामृत्यु की अनुमति दें’: शशिकांत की भावुक अपील

पीड़ा और निराशा का स्तर:

  • इच्छामृत्यु की मांग: लंबे समय से असहनीय शारीरिक दर्द और प्रशासनिक उपेक्षा से टूट चुके शशिकांत ने भावुक होकर कहा कि यदि शासन उन्हें बेहतर इलाज और न्याय नहीं दिला सकता, तो उन्हें कानूनी रूप से इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति दे दी जाए।

  • व्यवस्था से निराशा: हालांकि इच्छामृत्यु की विधिक प्रक्रिया अत्यंत जटिल और निर्धारित कानूनी मानकों के अधीन है, लेकिन शशिकांत की यह मांग उनकी गहरी वेदना और व्यवस्था के प्रति उपजी निराशा को दर्शाती है।

🤝 छत्तीसगढ़ की जनता से भी लगाई न्याय की गुहार

जनता से समर्थन की अपील:

  • आवाज उठाने की अपील: शशिकांत ने प्रदेश के आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की है कि वे उनकी आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने में सहयोग करें।

  • उम्मीद की किरण: 10 वर्षों से चारदीवारी में कैद शशिकांत को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी लाचारी का स्वतः संज्ञान लेगी और उनके जीवन को नई दिशा व न्याय प्रदान करेगी।