वंदे मातरम् विवाद पर ओवैसी का बयान: ‘संविधान की शुरुआत हम भारत के लोग से होती है’, बीजेपी-कांग्रेस में भी तकरार तेज
हैदराबाद (तेलंगाना): ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने वंदे मातरम् को लेकर छिड़े सियासी संग्राम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है।
हैदराबाद के दारुस्सलाम में ‘जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन’ को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि क्या नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी से अधिक समझदार हैं, क्या वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस से अधिक देशप्रेमी हैं, या फिर रवींद्रनाथ टैगोर से अधिक बुद्धिमान हैं? उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इन महान विभूतियों ने मिलकर ही राष्ट्रगीत के पहले दो छंद (पैरा) गाने का सर्वसम्मत फैसला लिया था।
🇮🇳 ‘कोई पूजा करता है, कोई दफन होता है’: संविधान और विविधता का दिया हवाला
सांसद ओवैसी के संबोधन के प्रमुख अंश:
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सांस्कृतिक विविधता: ओवैसी ने कहा कि भारत सभी धर्मों और आस्थाओं का देश है। यहाँ कोई देश की पूजा करता है तो कोई इसी वतन की मिट्टी में दफन हो जाता है।
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संविधान की प्रस्तावना: उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हमारे संविधान की शुरुआत ‘भारत माता’ से नहीं, बल्कि ‘हम भारत के लोग’ (We, the people of India) से होती है। हम इस देश के समान अधिकार वाले नागरिक हैं।
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तौहीन का आरोप: ओवैसी ने कहा कि कानून थोपने की कोशिश करके महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी राष्ट्रीय धरोहरों का अपमान किया जा रहा है।
⚔️ वंदे मातरम् के दो अंतरे पर BJP और कांग्रेस में भी छिड़ा वाकयुद्ध
राष्ट्रीय स्तर पर सियासी टकराव:
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मल्लिकार्जुन खरगे का पक्ष: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि पंडित नेहरू, महात्मा गांधी, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस ने ही वंदे मातरम् के 6 में से शुरुआती 2 छंद गाने का ऐतिहासिक फैसला लिया था और कांग्रेस उसी परंपरा का पालन करती है।
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अमित शाह का पलटवार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा था कि पूरे राष्ट्रगीत के बजाय केवल 2 पैरा गाना तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है।
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कानून की सर्वोच्चता: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति संविधान, संसद और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।