गुरदासपुर में विवाद! हड़ताल खत्म होते ही गांवों में कूड़ा फेंकने पहुंची गाड़ियां, ग्रामीणों ने रोका रास्ता
गुरदासपुर (पंजाब): गुरदासपुर में लंबे समय से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने के उपरांत शहर में एकत्रित कूड़े-कचरे को उठाने का कार्य त्वरित गति से प्रारंभ किया गया है।
इसी बीच शहर का कूड़ा सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाकर डंप करने को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। जैसे ही कूड़े से भरे प्राशासनिक वाहन सीमावर्ती गांवों की ओर पहुंचे, स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया तथा अनेक गाड़ियों को रास्ते में ही रोककर खड़ा कर दिया।
☣️ “गांवों में कूड़ा फेंकने से फैलेगी बदबू और गंभीर बीमारियां”, ग्रामीणों ने जाहिर की स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं
आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि नगर परिषद व प्रशासन द्वारा शहरों में एकत्रित कूड़े के विशाल ढेरों को ट्रकों में भरकर गांवों की सीमाओं के समीप डंप किया जा रहा है।
उनका स्पष्ट कहना है कि यदि इसी प्रकार ग्रामीण बस्तियों के निकट कचरा फेंका जाता रहा, तो संपूर्ण क्षेत्र का पर्यावरण प्रदूषित हो जाएगा और जनस्वास्थ्य पर इसका प्रत्यक्ष व गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने अंदेशा व्यक्त किया कि खुले में डंप किए जा रहे इस कचरे से भयंकर दुर्गंध, वायु प्रदूषण और कई तरह की संक्रामक बीमारियों के फैलने का प्रत्यक्ष जोखिम उत्पन्न हो गया है।
🛑 “स्थायी व वैज्ञानिक समाधान करे प्रशासन”: ग्रामीणों ने दी कूड़े की गाड़ियां रोकने की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए साफ शब्दों में कहा कि वे शहर का कचरा ग्रामीण अंचलों में लाकर फेंकने की इस नीति को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि अपशिष्ट प्रबंधन (Garbage Disposal) के लिए एक स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान निकाला जाए, ताकि ग्रामीण आबादी की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस समस्या का ठोस व समुचित समाधान नहीं कर दिया जाता, तब तक वे कचरे से भरे वाहनों का इसी प्रकार विरोध जारी रखेंगे।