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केंद्र सरकार की ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ में बड़े बदलाव की तैयारी, ज्वैलर्स को मिल सकता है 1% अतिरिक्त इंसेंटिव

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetisation Scheme – GMS) को अधिक व्यावहारिक और जन-सुलभ बनाने हेतु इसमें व्यापक परिवर्तन किया जा सकता है।

यदि नया प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो ज्वैलर्स को आम ग्राहकों से प्राप्त किया गया पुराना सोना अधिकृत रिफाइनरी तक पहुँचाने के एवज में लगभग 1% का अतिरिक्त इंसेंटिव प्राप्त होगा। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने इस संदर्भ में सरकार को एक नया रूपरेखा प्रस्ताव प्रेषित किया है। इस नए मॉडल के तहत, ज्वैलर्स ग्राहकों से पुराना सोना संग्रहित कर रिफाइनर्स को सौंपेंगे और बदले में उन्हें इस सेवा हेतु कमीशन/इंसेंटिव प्रदान किया जाएगा।

💎 ज्वैलर्स क्यों बनेंगे इस योजना का मुख्य केंद्र? IBJA अध्यक्ष ने स्पष्ट की रणनीति

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने जानकारी देते हुए बताया कि यदि यह संशोधित योजना धरातल पर लागू होती है, तो ज्वैलर्स प्रत्येक लेन-देन पर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।

इससे ज्वैलर्स स्वयं आगे बढ़कर इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे और ग्राहकों को इसमें सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। कोठारी के अनुसार, आम भारतीय नागरिक अपना पुराना सोना बेचने या बदलने के लिए बैंकों की तुलना में ज्वैलर्स के पास जाना अधिक सुविधाजनक और सहज समझता है। प्रस्ताव में 0.75% से 1% तक इंसेंटिव देने की अनुशंसा की गई है, जिस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लिया जाएगा।

🏦 बैंकों की भूमिका होगी सीमित, ज्वैलर्स संभालेंगे फ्रंट-एंड ऑपरेशन्स

पूर्व की व्यवस्था में बैंक इस योजना के मुख्य केंद्र बिंदु थे, परंतु आम जनता को यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती थी कि किस बैंक की कौन-सी विशिष्ट शाखा सोना जमा करने हेतु अधिकृत है।

इस सूचनात्मक अस्पष्टता के कारण यह योजना अपेक्षा अनुरूप सफल नहीं हो सकी। नई प्रस्तावित प्रणाली में सोना एकत्र करने का प्रत्यक्ष कार्य ज्वैलर्स द्वारा किया जाएगा, जबकि सोने का वित्तीय डिपॉजिट अकाउंट बैंक में ही संचालित रहेगा। अर्थात ग्राहकों से जुड़ा संपूर्ण फ्रंट-एंड संपर्क ज्वैलर्स ही संभालेंगे। सेंको गोल्ड एंड डायमंड्स (Senco Gold & Diamonds) के एमडी और सीईओ सुवंकर सेन के अनुसार, इस कदम से ज्वैलरी स्टोर्स पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ेगी और कारोबार को सीधा लाभ पहुँचेगा।

💬 “घरों में रखे हजारों टन सोने को अर्थव्यवस्था में लाना और आयात बिल घटाना ही मुख्य उद्देश्य”: केंद्र सरकार

“सरकार का प्राथमिक लक्ष्य भारतीय परिवारों व ट्रस्टों के पास निष्क्रिय पड़े हजारों टन सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना है। इससे देश के कुल स्वर्ण आयात (Gold Import) में उल्लेखनीय कमी आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा। सरकार आगामी त्योहारी सीजन से पूर्व इसे लागू करने की योजना बना रही है।”

⚙️ जानिए कैसे काम करती है गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS Execution Flow)

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के अंतर्गत ग्राहक अपना पुराना या अप्रयुक्त सोना अधिकृत कलेक्शन एंड प्योरिटी टेस्टिंग सेंटर (CPTC) अथवा अधिकृत ज्वैलर के पास लेकर जाते हैं।

वहाँ आधुनिक मशीनों द्वारा सोने की सटीक शुद्धता (Purity) की जांच की जाती है। ग्राहक की औपचारिक सहमति के उपरांत सोने को पिघलाकर शुद्ध बुलियन बार में परिवर्तित किया जाता है और बैंक के ‘गोल्ड डिपॉजिट अकाउंट’ (Gold Deposit Account) में जमा कर दिया जाता है। इस जमा सोने पर सरकार द्वारा निश्चित दर से ब्याज प्रदान किया जाता है। योजना की अवधि पूर्ण होने पर ग्राहक अपनी इच्छानुसार मूल सोना (गिन्नी/बार के रूप में) या उसकी तत्कालीन बाजार कीमत के समतुल्य नकद धनराशि प्राप्त कर सकते हैं।