हरियाणा में बैंक घोटाले के बाद सरकार का बड़ा एक्शन! सभी DDOs के बैंक खातों की 7 दिन में मांगी रिपोर्ट, होगी सख्त कार्रवाई
चंडीगढ़: हरियाणा में सामने आए हालिया बहुचर्चित बैंक घोटाले के उपरांत राज्य सरकार ने शासकीय वित्तीय लेन-देन की निगरानी और जवाबदेही को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। वित्त विभाग ने राज्य के सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर उनके प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर्स (DDOs) के सभी बैंक खातों का विस्तृत ब्यौरा एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
📜 प्रधान महालेखाकार के निर्देश पर 5 वर्षों (2021-22 से 2025-26) के DDO खातों का मांगा गया ब्यौरा
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से प्रेषित आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह विस्तृत ब्यौरा प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), हरियाणा के विशेष आग्रह पर मांगा गया है।
शासकीय आदेशों के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 तक की अवधि में संचालित सभी डीडीओ (DDO) बैंक खातों का विवरण निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। इसके अंतर्गत विभागों को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कुल कितने डीडीओ बैंक खाते सक्रिय रहे, कितने खातों में कोई व्यय (Non-operational Accounts) नहीं हुआ और उनमें कितनी सरकारी राशि जमा रही।
⚠️ 7 दिन में ब्यौरा न देने पर होगी सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई, विजिलेंस और सीबीआई जांच के बाद सख्त कदम
वित्त विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि 7 दिवस की निर्धारित समय-सीमा के भीतर जानकारी न देने वाले विभागों और इसमें लापरवाही बरतने वाले DDOs के विरुद्ध सीधे अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) तथा राज्य विजिलेंस (State Vigilance) की प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि निजी व अनधिकृत बैंक खातों में फर्जी डेबिट मेमो, जाली हस्ताक्षर (Fake Signatures) और शेल कंपनियों के खातों का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का सरकारी फंड डायवर्ट किया गया था। इसी गंभीर अनियमितता को देखते हुए अब निष्क्रिय एवं बिना लेन-देन वाले खातों का पूर्ण मिलान प्रधान महालेखाकार (AG) के आधिकारिक रिकॉर्ड से कराया जा रहा है।