सागर की बेटी का कमाल! कभी मां को खेलते देख सीखा शतरंज, आज अंजलि चौरसिया बनीं नेशनल खिलाड़ी व सीनियर ऑर्बिटर
सागर (मध्य प्रदेश): कभी अपने घर में मां और भाई को शतरंज के बोर्ड पर चालें चलते देख उत्सुक रहने वाली अंजलि चौरसिया आज ‘शह और मात’ के इस बौद्धिक खेल की राष्ट्रीय स्तर की स्थापित खिलाड़ी बन चुकी हैं।
अंजलि अब राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताओं में ‘सीनियर नेशनल ऑर्बिटर’ (निर्णायक) जैसी महत्वपूर्ण भूमिका का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। अंजलि की यह असाधारण और प्रेरणादायक यात्रा इस बात को साबित करती है कि यदि प्रतिभा को सही मार्गदर्शन और दिशा मिले, तो संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने वाली बेटियों के लिए अंजलि चौरसिया आज एक रोल मॉडल बन चुकी हैं।
♟️ शालेय और राज्य स्तर से लेकर अंतर-विश्वविद्यालयीन प्रतियोगिताओं में मनवाया अपनी प्रतिभा का लोहा
राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली अंजलि चौरसिया की खेल प्रतिभा को ‘लक्ष्य प्रोजेक्ट’ ने तराश कर और निखारा।
शालेय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन ने अंजलि का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। इसी कड़ी में उन्होंने महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से दो बार अंतर-विश्वविद्यालयीन (Inter-University) शतरंज प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। अपनी उत्कृष्ट रणनीतिक सोच और संयमित खेल शैली के दम पर वे बहुत जल्द मध्य प्रदेश की उभरती हुई अग्रणी महिला शतरंज खिलाड़ियों में शुमार हो गईं।
🏆 51वीं वूमेन नेशनल और 39वीं जूनियर वूमेन नेशनल में किया मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व, बनीं सीनियर ऑर्बिटर
वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में आयोजित 51वीं ‘वूमेन नेशनल शतरंज चैंपियनशिप’ में उन्होंने मध्य प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व कर अपनी श्रेष्ठता का लोहा मनवाया।
इसके उपरांत जमशेदपुर में आयोजित 39वीं ‘जूनियर वूमेन नेशनल’ शतरंज स्पर्धा में भी राज्य की ओर से खेलते हुए राष्ट्रीय स्तर का बहुमूल्य अनुभव प्राप्त किया। एक सफल खिलाड़ी के रूप में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करने के बाद अंजलि ने ‘सीनियर नेशनल ऑर्बिटर’ की कठिन परीक्षा भी उत्तीर्ण की। वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न आधिकारिक शतरंज प्रतियोगिताओं में मुख्य निर्णायक (ऑर्बिटर) के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
🏠 परिवार बना सबसे बड़ी ताकत, बहन अमृता भी हैं राष्ट्रीय खिलाड़ी; गांव की बेटियों को दे रहीं फ्री ट्रेनिंग
अंजलि की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट और निरंतर योगदान रहा है।
घर में शुरुआत से ही शतरंज का माहौल होने के कारण उन्हें हर मोड़ पर प्रेरणा मिलती रही। उनकी बहन अमृता चौरसिया भी स्वयं राष्ट्रीय स्तर की एक स्थापित शतरंज खिलाड़ी हैं। दोनों बहनों ने अपने असाधारण प्रदर्शन से यह साबित कर दिखाया है कि यदि परिवार बेटियों को प्रोत्साहन दे, तो ग्रामीण और छोटे शहरों की बेटियां भी राष्ट्रीय मंचों पर अपनी अमिट पहचान बना सकती हैं।
अपनी इन उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित रखने के बजाय अंजलि अब अपने गांव की होनहार बेटियों को निःशुल्क (फ्री) शतरंज का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक ग्रामीण बेटियों को इस बौद्धिक खेल से जोड़कर उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें आगे ले जाना है। अंजलि अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय समन्वय मंच, ‘प्रोजेक्ट लक्ष्य’ और अपने कुशल प्रशिक्षक (कोच) जफर खान को देती हैं।