ब्रेकिंग
Ram Mandir Donation Scam SIT: सुप्रीम कोर्ट में SIT का खुलासा; राम मंदिर काउंटिंग रूम से चोरी के 105... Delhi High Court PIL: डीटीसी बस हड़ताल से थमीं दिल्ली की रफ्तार; जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की पीठ करे... Faridabad CM Flying Raid: तिगांव में अवैध बुलेटप्रूफ कार वर्कशॉप पर CM फ्लाइंग का छापा; 4 लग्जरी गाड... Gurugram MCG Action: भोंडसी में नगर निगम का बड़ा बुलडोजर एक्शन; 6 अवैध भवन सील, 4 ध्वस्त Gurugram Crime News: गुड़गांव की नाथूपुर सब्जी मंडी में हिताची ATM में लगी भीषण आग; मशीन में रखा कैश... Raipur News: रायपुर उत्तर में विधायक पुरन्दर मिश्रा की 8 दिवसीय पदयात्रा; सीएम साय करेंगे आगाज, राज्... Kanker Yuva Udaan Event: '2047 तक विकसित भारत का सपना युवाओं के कंधे पर'; कांकेर में बोले युवा आयोग ... Kanker BSF Camp News: माओवाद के साये से निकलकर वर्दी के सपने; कांकेर के तुमापाल में BSF कैंप में उमड... Raipur News: भाटागांव सब्जी बाजार विवाद में आयुक्त का आश्वासन; 7 दिनों में सामने आएंगे लॉटरी आवंटन क... Chhattisgarh News: कोरबा के पूछपारा में शर्मनाक घटना; नमाजी बुजुर्ग पर हमला कर युवक फरार, मेडिकल कॉल...

जनजातीय कल्याण और जैव-संसाधन संरक्षण के लिए बड़ा कदम! जनजातीय कार्य मंत्रालय और CSIR-NBRI के बीच MoU साइन

नई दिल्ली/लखनऊ: जनजातीय कल्याण को बढ़ावा देने, टिकाऊ आजीविका को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने की एक बड़ी पहल के तहत केंद्र सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय (MoTA) ने लखनऊ स्थित CSIR-नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-NBRI) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस तीन साल की पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य दोनों संगठनों के बीच एक निरंतर और सहयोगी संबंध स्थापित करना है, ताकि पूरे देश में जनजातीय जैव-संसाधनों के संरक्षण और एथनोबॉटैनिकल (पारंपरिक वनस्पति-संबंधी) मूल्यांकन के लिए रिसर्च और विकास (R&D) को बढ़ावा दिया जा सके।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा की गरिमामयी मौजूदगी में मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर और CSIR-NBRI के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शसानी ने इस MoU पर हस्ताक्षर किए। इस खास मौके पर CSIR के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव, वैज्ञानिक डॉ. सचित्र रथ, वैज्ञानिक डॉ. मनीष भोयर और जनजातीय कार्य मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

🔬 दुर्लभ औषधीय पौधों के संरक्षण पर ध्यान, आदिवासी युवाओं को दी जाएगी वैज्ञानिक और तकनीकी ट्रेनिंग

इस समझौते के तहत आदिवासी कल्याण और समुदाय की स्वायत्तता सभी वैज्ञानिक गतिविधियों के मूल सिद्धांत हैं।

यह साझेदारी खास तौर पर दुर्लभ, लुप्तप्राय और खतरे में पड़ी (RET) औषधीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण पर केंद्रित है। इसके लिए टिश्यू कल्चर सुविधाओं और स्पेशलाइज्ड सीड बैंकों के विकास जैसे उन्नत वैज्ञानिक उपाय किए जा रहे हैं। लंबे समय तक चलने वाली और समुदाय की ओर से संचालित स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय आदिवासी युवाओं को इन प्रसार और संरक्षण तकनीकों में व्यावहारिक क्षमता निर्माण और तकनीकी ट्रेनिंग दी जाएगी।

इसके अतिरिक्त, सभी क्षेत्रीय आकलन और रिसर्च एक्टिविटीज के लिए स्थानीय ग्राम सभाओं और आदिवासी कम्युनिटी की पूर्व-सूचित सहमति (PIC) अनिवार्य होगी, जो जैव विविधता अधिनियम, 2002 का कड़ाई से अनुपालन करती है। हर जॉइंट प्रोजेक्ट प्रपोजल में जमीनी स्तर पर सामुदायिक विकास, लोकल वैल्यू एडिशन और क्षमता निर्माण के लिए एक तय बजट मद शामिल होगा। स्थानीय हितों की रक्षा के लिए उत्पन्न बौद्धिक संपदा पर MoTA और CSIR-NBRI का संयुक्त स्वामित्व होगा, जिसे योगदान देने वाले आदिवासी समुदायों के लिए न्यास (Trust) के रूप में रखा जाएगा या उनके साथ समान रूप से साझा किया जाएगा। वित्तीय लाभ राष्ट्रीय या राज्य जैव विविधता कोष और MoTA की समर्पित कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से वापस दिया जाएगा।

यह समझौता स्पष्ट रूप से पारंपरिक ज्ञान को आदिवासी लोगों की सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता देता है, जिसके लिए अनधिकृत व्यावसायीकरण को रोकने के लिए राष्ट्रीय पहुंच और लाभ साझाकरण (Access and Benefit Sharing) तंत्रों का कड़ाई से पालन जरूरी है।

🌿 आधुनिक विज्ञान से जुड़ेगा आदिवासियों का पारंपरिक ज्ञान, टिकाऊ विकास और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

संयुक्त कार्यक्रमों, सेमिनारों और पारंपरिक जानकारों व वैज्ञानिकों के बीच लगातार चलने वाले एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) का मकसद आदिवासी समुदाय के समृद्ध ज्ञान को आधुनिक वनस्पति विज्ञान से जोड़ना है।

आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाकर और स्थानीय क्षमता को मजबूत करके, यह गठबंधन यह पक्का करता है कि जैव-संसाधन संरक्षण का सीधा फायदा समुदाय के टिकाऊ विकास, आजीविका वृद्धि और सांस्कृतिक संरक्षण के रूप में उन तक पहुंचे।