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देहरादून में 16 करोड़ का नया पुल पहली ही बारिश में धंसा! 16 दिनों में खुला भ्रष्टाचार? वाहनों की आवाजाही बंद

देहरादून: देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर टौंस नदी के ऊपर नंदा की चौकी में नवनिर्मित पुल शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। लगभग 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया यह नया पुल पहली ही मानसूनी बारिश में धंस गया, जिसके बाद इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) की तकनीकी टीमों ने पुल का मौका मुआयना शुरू कर दिया है और धंसने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।

⏳ सितंबर 2025 में टूटा था पुराना पुल, 10 महीने तक अस्थायी पुलिया से चलता रहा यातायात

उल्लेखनीय है कि नंदा की चौकी स्थित पुराना मुख्य पुल 15 सितंबर 2025 की रात को अचानक क्षतिग्रस्त हो गया था। उस समय पुल की एबटमेंट वॉल और एक मुख्य स्लैब टूट जाने के बाद राजमार्ग पर आवागमन चालू रखने के लिए नदी में ह्यूम पाइप डालकर एक अस्थायी पुलिया तैयार की गई थी। यह वैकल्पिक पुलिया लगभग 10 महीने तक स्थानीय निवासियों और वाहनों के आवागमन का मुख्य सहारा बनी रही।

🏗️ मार्च 2026 में शुरू हुआ था निर्माण, 12 जुलाई को शुरू हुआ था नए पुल पर ट्रैफिक

इसके बाद मार्च 2026 में करीब 16 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से नए स्थायी मुख्य पुल का निर्माण कार्य तेजी से शुरू कराया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 11 जुलाई की रात को नदी के तेज बहाव में अस्थायी पुलिया भी बहकर धंस गई। स्थिति की आपातकालीन आवश्यकता को देखते हुए इसके अगले ही दिन, यानी 12 जुलाई से नए मुख्य पुल पर वाहनों का विधिवत आवागमन शुरू करा दिया गया था।

🛑 16 दिनों में ही क्षतिग्रस्त हुआ 16 करोड़ का पुल, सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों की आवाजाही रोकी

हालांकि, यह नई व्यवस्था ज्यादा दिनों तक सुचारू नहीं चल सकी। क्षेत्र में हुई पहली ही मूसलाधार बारिश के दौरान नए पुल के एक बड़े हिस्से में भारी धंसाव सामने आ गया, जिससे दुर्घटना की आशंका को देखते हुए यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। पुल की सड़क पर गहरे गड्ढे बनने की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। सुरक्षा को प्राथमिक ध्यान में रखते हुए फिलहाल नए पुल से सभी प्रकार के छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। मात्र 16 दिनों में ही 16 करोड़ का पुल क्षतिग्रस्त हो जाने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

⚖️ कार्यदायी संस्था और ठेकेदार पर भड़के स्थानीय लोग, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

इस शर्मनाक घटनाक्रम के बाद पुल का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था, संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदार की कार्यशैली तथा इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर उंगलियां उठने लगी हैं। स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और गुणवत्ता से समझौता करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग उठाई है।