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Mahakal Mandir Donation: अयोध्या जैसी घटना से सबक, महाकाल मंदिर में दान के रिकॉर्ड और सुरक्षा को लेकर महापौर की बड़ी मांग

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान चोरी की घटना ने देशभर के बड़े धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी कड़ी में, उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान आभूषणों के सत्यापन और सूचीकरण की चर्चा तेज हो गई है। इसे लेकर महापौर मुकेश टटवाल ने जिला कलेक्टर एवं महाकाल मंदिर समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर दान सामग्री के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने का आग्रह किया है।

📱 डिजिटल ऐप से दिखेगा श्रद्धालुओं को उनके दान का रिकॉर्ड

महापौर मुकेश टटवाल ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि दान सामग्री के सत्यापन के लिए एक समर्पित ऐप तैयार किया जाना चाहिए। इससे श्रद्धालुओं को उनके द्वारा अर्पित किए गए दान का रिकॉर्ड ऑनलाइन दिख सकेगा। महापौर का कहना है कि बाबा महाकाल के दरबार में हर रोज लाखों भक्त बड़ी मात्रा में सोना, चांदी, आभूषण और नगद राशि दान करते हैं। इस दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड और उसका उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित होना चाहिए।

🔄 रुकी हुई प्रक्रिया को मिलेगी नई गति

महापौर ने बताया कि इस संबंध में पहले भी एक समिति गठित की गई थी, लेकिन चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण दान सामग्री के सत्यापन और उपयोग से जुड़ी प्रक्रिया बीच में ही रुक गई थी। अब जबकि दान चोरी जैसी घटनाएं चिंता का विषय बनी हैं, महापौर ने इस विषय को फिर से आगे बढ़ाने और वर्तमान व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया है।

🛡️ मंदिर प्रबंधन ने दी सुरक्षा की जानकारी

दान सुरक्षा के सवालों पर मंदिर समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि दान में प्राप्त सभी आभूषणों का अधिकृत वैल्युअर द्वारा मूल्यांकन कराया जाता है और उसके बाद उन्हें सुरक्षित कोठार में जमा किया जाता है। दान की प्रत्येक वस्तु की तीन प्रतियां (रसीद) बनाई जाती हैं, जिसका ऑडिट भी समय-समय पर होता है। प्रबंधन के अनुसार, दान की प्रत्येक वस्तु पूरी तरह से सुरक्षित है और व्यवस्थित रिकॉर्ड का पालन किया जा रहा है।