ब्रेकिंग
Indian Stock Market: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी बाजार पर संकट, 'सुपर अल नीनो' से क्यों... WhatsApp New Feature: अब नंबर देने की जरूरत नहीं! वॉट्सएप पर अपना यूजरनेम बनाने की सुविधा शुरू Draupadi Panchali: पांचाली क्यों कहलाईं द्रौपदी? पांडवों से विवाह के पीछे का पौराणिक कारण Bilaspur News: टेंट लगाने के दौरान मजदूर की करंट से दर्दनाक मौत, होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवा... मनेंद्रगढ़: गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देने वाली महिला गिरफ्तार, पुलिस ने बीएनएसएस की धाराओं मे... Rudreshwar Corridor Dhamtari: धमतरी को मिली बड़ी सौगात, 20 करोड़ की लागत से विकसित होगा रुद्रेश्वर धाम Rath Yatra Special Train: गोंदिया-पुरी के बीच चलेगी रथयात्रा स्पेशल ट्रेन, जानें टाइम-टेबल और रूट Dhamtari News: धमतरी के सत्यांशु दीप का स्पेशल ओलंपिक फुटबॉल टीम में चयन, स्वीडन में करेंगे भारत का ... एमसीबी हत्याकांड: तिहरे हत्याकांड के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, मनेन्द्रगढ़ पहुंचे करणी सेना ... रायपुर: सुपरवाइजर और सेल्समैन बनाने का झांसा देकर ठगी, पुलिस ने फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने वाले ग...

Indian Stock Market: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी बाजार पर संकट, ‘सुपर अल नीनो’ से क्यों सहमे हैं निवेशक?

ब्रेंट क्रूड की कीमतें अपने पीक से 40 फीसदी तक नीचे आ चुकी हैं, लेकिन भारतीय शेयर बाजार में अपेक्षित तेजी गायब है। बाजार पर अब ग्लोबल ऑयल शॉक के बजाय ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा मंडरा रहा है। मानसून की पिछले एक दशक में सबसे कमजोर शुरुआत ने भारत की 56 फीसदी जीडीपी (जो खपत से जुड़ी है) को खतरे में डाल दिया है। जानकारों के अनुसार, अब बाजार के लिए बड़ा रिस्क कच्चे तेल की सप्लाई नहीं, बल्कि घरेलू मांग में कमी है।

🌦️ मानसून की कमजोर शुरुआत और रूरल इकोनॉमी पर मार

पिछले दो सालों से निफ्टी 50 ने निवेशकों को कोई खास रिटर्न नहीं दिया है और आगे की स्थिति भी अनिश्चित है। 26 जून, 2026 तक बारिश का आंकड़ा लॉन्ग-टर्म एवरेज (LTA) से 42 फीसदी कम रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी मानसून का अनुमान घटाकर 90 फीसदी कर दिया है, जो पिछले 11 सालों में सबसे कमजोर अनुमान है। चूंकि भारत का 46 फीसदी वर्कफोर्स खेती पर निर्भर है, इसलिए यह स्थिति रूरल इकोनॉमी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

🏢 सेक्टर्स पर प्रभाव और कंपनियों की रेटिंग में कटौती

ब्रोकरेज हाउस इस स्थिति को देखते हुए कोर सेक्टर की रेटिंग घटा रहे हैं। ‘पीएल कैपिटल’ ने कंज्यूमर सेक्टर में अपना वेटेज कम किया है और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) जैसे शेयरों में भी जोखिम की चेतावनी दी है। ‘एमकैपिटल’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस बार कम सुरक्षा उपायों (बफर्स) के साथ मंदी की ओर बढ़ रहा है। आरबीआई के पास भी महंगाई और गिरते रुपये के कारण अर्थव्यवस्था को सहारा देने की सीमित गुंजाइश बची है।

⚖️ मार्केट री-रेटिंग की रुकी हुई रफ्तार

एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा स्तरों से बाजार में किसी सार्थक री-रेटिंग के लिए नए ट्रिगर की आवश्यकता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) के आउटफ्लो में कमी आना। फिलहाल, बाजार की नजर पूरी तरह से मानसून की प्रगति और अल नीनो की तीव्रता पर टिकी हुई है।

“हालांकि सुपर अल नीनो का जोखिम वास्तविक है, लेकिन भारत के पास पिछले वर्षों के मुकाबले गेहूं-चावल के मजबूत बफर स्टॉक और बेहतर सिंचाई व्यवस्था का लाभ भी है। कुल मिलाकर मैक्रो-इकोनॉमिक असर को संभाला जा सकता है, लेकिन तत्काल समय के लिए बाजार की राह बादलों की स्थिति पर निर्भर करेगी।” — केयरऐज रेटिंग्स की रिपोर्ट