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Ram Mandir Donation Scam: करोड़ों के दान गबन का खुलासा; अयोध्या में दानपात्रों से नकदी चोरी का पूरा ‘नेटवर्क’ आया सामने

अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्रों से नकदी गायब होने के मामले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जैसे-जैसे एसआईटी (SIT) की जांच आगे बढ़ रही है, करोड़ों रुपये के गबन की आशंका पुख्ता होती जा रही है। जांच में सामने आया है कि यह खेल प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) से पहले ही शुरू हो गया था, जो समय के साथ और बड़े पैमाने पर फैल गया।

🕸️ अनुकल्प मिश्रा और उसके नेटवर्क का जाल

एसआईटी की पड़ताल में मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा मुख्य आरोपी के रूप में उभरा है। आरोप है कि उसने एक ट्रस्टी की अनुशंसा पर नियुक्ति पाने के बाद अपने बहनोई लवकुश मिश्रा और अन्य परिचितों को गणना कार्य में शामिल कर लिया। उसने शिफ्ट में कार्यरत कर्मचारियों को अपने प्रभाव में लेकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिससे दानराशि में सेंधमारी आसान हो गई।

🚾 कैसे अंजाम दिया जाता था ‘अवैध खेल’?

जांच में खुलासा हुआ है कि दानपात्रों से निकाली गई नकदी को पहले यात्री सुविधा केंद्र (PFC) के बाथरूम में छिपाया जाता था। मौका मिलते ही इसे सुरक्षा जांच से बचाकर बाहर निकाला जाता और कौशलपुरी स्थित ठिकाने तक पहुँचाया जाता, जहाँ रकम का बंटवारा होता था। पीएफसी के बेसमेंट में हुई पूछताछ में सुरक्षा और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

⚖️ जांच के घेरे में कई बड़े नाम

एसआईटी ने रामशंकर यादव, मनीष यादव और राजेश पाठक सहित कई संदिग्ध कर्मचारियों से गहन पूछताछ की है। जांच की आंच अब रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव तक भी पहुँच गई है, जिन पर दानराशि को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी इतने लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के कैसे चलती रही?

📊 वास्तविक नुकसान का आकलन जारी

फिलहाल एसआईटी बैंक जमा विवरण, सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर रही है। राम मंदिर प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर उठे इन सवालों ने न केवल श्रद्धालुओं को चिंतित किया है, बल्कि प्रबंधन के सामने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की बड़ी चुनौती भी पेश की है।