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Boeing 787 Mystery: अहमदाबाद विमान हादसे के पीछे क्या थी तकनीकी खराबी? कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का सबसे बड़ा सस्पेंस

12 जून 2025 की दोपहर, अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 ने 242 लोगों के साथ आसमान छुआ, लेकिन सिर्फ 32 सेकंड बाद ही यह ड्रीमलाइनर बीजे मेडिकल कॉलेज की इमारत से जा टकराया। इस हृदयविदारक हादसे में 260 लोगों की जान चली गई। आज इस हादसे को एक साल हो चुका है, लेकिन फाइनल जांच रिपोर्ट और इसके कारणों पर अभी भी कॉर्पोरेट और तकनीकी बहस जारी है।

🎧 कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का रहस्य

हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट ने विमानन जगत को हिला दिया था। डेटा से पता चला कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों के ‘फ्यूल कंट्रोल स्विच’ अचानक ‘कटऑफ’ पोजीशन पर चले गए थे। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज आवाजों ने एक खतरनाक नैरेटिव को जन्म दिया—क्या पायलट ने जानबूझकर ऐसा किया? हालांकि, पायलटों के संघ ने इस थ्योरी को खारिज करते हुए इसे ‘मैन्युफैक्चरर को बचाने की साजिश’ बताया है।

⚙️ तकनीकी खराबी या सिस्टम फेलियर?

विशेषज्ञों का एक वर्ग विमान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम में इलेक्ट्रिकल फेलियर की संभावना जताता है। थ्योरी के अनुसार, सिस्टम रीबूट के कारण विमान के सॉफ्टवेयर को भ्रम हुआ कि वह जमीन पर है और उसने ऑटोमैटिक कमांड देकर इंजनों की ईंधन सप्लाई काट दी। ‘रैम एयर टरबाइन’ (RAT) का तुरंत खुल जाना इस बात का संकेत है कि खराबी रनवे पर ही शुरू हो गई थी।

🛡️ ‘वॉकवे टू लाइफ’: एक चमत्कारिक सर्वाइवर

इस भयावह हादसे में विश्वास कुमार रमेश इकलौते सर्वाइवर थे, जो सीट नंबर 11A पर सवार थे। विमान के दो टुकड़ों में बंटने और स्ट्रक्चरल स्प्लिट के कारण वे मौत के मुंह से बाहर निकलने में सफल रहे। आज वे इस त्रासदी से उपजे मानसिक आघात से जूझ रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुआवजे को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।

⚖️ मुआवजा विवाद और कॉर्पोरेट दबाव

जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एअर इंडिया द्वारा परिवारों को एक सीमित हर्जाना देकर ‘इंडेमनिटी क्लॉज’ साइन कराने की कोशिश को वकीलों ने दमनकारी रणनीति बताया है। मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1999 के तहत, यदि तकनीकी खराबी सिद्ध होती है, तो कंपनी की वित्तीय देनदारी असीमित हो जाएगी, जिससे बचने के लिए कथित तौर पर भारी लॉबिंग की जा रही है।