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Rahul Gandhi Meets Vedant: सीबीएसई (CBSE) की गड़बड़ी पर आवाज उठाने वाले छात्र से मिले राहुल गांधी; ट्रोलिंग के मुद्दे पर हुई चर्चा

सीबीएसई (CBSE) की ‘OSM’ (ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम) व्यवस्था में हुई एक बड़ी गड़बड़ी ने 12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव के भविष्य को संकट में डाल दिया था, जब उन्हें किसी और की आंसर शीट थमा दी गई थी। इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने के बाद वेदांत को न्याय मिलने के बजाय ऑनलाइन ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वेदांत और उनके परिवार से मुलाकात कर इस पूरे मामले पर चर्चा की।

🗣️ ‘आवाज उठाने पर मिले देशद्रोही और आतंकवादी के तमगे’

वेदांत और उनके बड़े भाई सिद्धांत ने राहुल गांधी को बताया कि जब उन्होंने CBSE की गलती के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें सोशल मीडिया पर ‘देशद्रोही’, ‘सरकार विरोधी एजेंट’ और यहां तक कि ‘पाकिस्तानी’ तक कहा गया। एक बातचीत के दौरान, राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में जब पूछा कि क्या उन्हें ‘आतंकवादी’ भी कहा गया, तो सिद्धांत ने बताया कि उन्हें ‘डीप स्टेट एजेंट’ तक करार दिया गया, जो भारत में अशांति फैला रहे हैं।

⚖️ राहुल गांधी का तीखा प्रहार

इस मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने अपने ‘X’ पोस्ट में सरकार और CBSE पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने वेदांत और उसके साथियों को ‘होनहार और बहादुर युवा भारतीय’ बताते हुए लिखा कि जब छात्रों ने सीधे सवाल पूछे, तो उन्हें जवाब के बजाय अपमान मिला। राहुल गांधी ने संकल्प लिया कि वे इन छात्रों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए लड़ाई लड़ेंगे।

🔍 व्यवस्था की गड़बड़ी और छात्रों का आक्रोश

वेदांत का मामला केवल एक छात्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह CBSE की मूल्यांकन व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। OSM जैसी तकनीकी प्रणालियों में मानवीय या तकनीकी भूल के कारण जब छात्रों का भविष्य दांव पर लगता है, तो सिस्टम की जवाबदेही तय होना अनिवार्य है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे सत्ता के प्रति सवाल उठाने वालों को ट्रोलिंग के जरिए दबाने की कोशिश की जाती है।

संपादकीय टिप्पणी: क्या आपको लगता है कि शिक्षा बोर्ड्स (जैसे CBSE) को अपनी मूल्यांकन प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाने और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक ‘फास्ट-ट्रैक रिड्रेसल सिस्टम’ बनाना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।