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Kanpur ITBP Jawan Case: कानपुर में ITBP जवान की मां का हाथ काटने का मामला; दूसरी जांच में दोनों अस्पताल दोषी, FIR के आदेश

कानपुर: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के एक सिपाही की मां के इलाज में हुई भयानक मेडिकल लापरवाही और हाथ काटे जाने के दिल दहला देने वाले मामले में एक बहुत बड़ा और नया आधिकारिक अपडेट सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय दोबारा जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें कानपुर के दोनों नामचीन निजी अस्पतालों को गंभीर रूप से दोषी पाया गया है। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद अब कानपुर पुलिस कमिश्नरेट दोनों आरोपी अस्पतालों के प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज करने की पूरी कानूनी तैयारी में जुट गई है।

गौरतलब है कि जब इस दर्दनाक मामले ने तूल पकड़ा तो खुद आईटीबीपी के कमांडेंट अपने जवानों के साथ कानपुर पहुंचे थे। इस दौरान सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह बात भयंकर चर्चा का विषय बन गई थी कि आईटीबीपी के जवानों ने गुस्से में आकर कानपुर पुलिस कमिश्नर के मुख्य कार्यालय का घेराव कर लिया है। हालांकि बाद में, खुद आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि वो केवल निष्पक्ष न्याय की मांग को लेकर कानपुर पुलिस कमिश्नर से शिष्टाचार मुलाकात करने के लिए आए थे, जिसके बाद ही मामले में दोबारा निष्पक्ष जांच के कड़े आदेश जारी हुए थे।

🏥 सांस की बीमारी का इलाज कराने आई थीं सिपाही की मां: कृष्णा अस्पताल की लापरवाही से फैला इंफेक्शन, पारस अस्पताल में काटना पड़ा हाथ

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा दोबारा की गई जांच के बाद जो रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई है, उसने चिकित्सा जगत को शर्मसार कर दिया है। कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने इस रिपोर्ट के आधार पर कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल के शीर्ष प्रबंधन व दोषी डॉक्टर्स के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज करने का लिखित आदेश थाना पुलिस को जारी कर दिया है। दरअसल, यह पूरा खौफनाक हादसा कानपुर के महाराजपुर में स्थित आईटीबीपी के कमांड ऑफिस में देश की सुरक्षा में तैनात जांबाज सिपाही विकास सिंह की बुजुर्ग मां के साथ हुआ था।

विकास की मां को अचानक सांस लेने में गंभीर दिक्कत हुई थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन कृष्णा अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की घोर लापरवाही के कारण इलाज के दौरान उनके हाथ में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा इंफेक्शन (गैंग्रीन) फैल गया। जब स्थिति बिगड़ने लगी तो बेबस विकास अपनी मां को उस अस्पताल से आनन-फानन में बाहर लेकर निकला।

⚖️ तीन दिन तक मां का कटा हाथ लेकर इंसाफ के लिए भटकता रहा बेटा: रेल बाजार थाने से लेकर अधिकारियों के दफ्तरों के काटे चक्कर

सिपाही विकास जब अपनी मां की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें पारस हॉस्पिटल (बिठूर) लेकर पहुंचा, तो वहां के सर्जनों ने जांच के बाद कहा कि इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल चुका है और अगर मां की जान बचानी है, तो तुरंत उनका दाहिना हाथ काटना पड़ेगा। मजबूरन डॉक्टरों ने उनकी मां का दाहिना हाथ कोहनी के पास से काट कर अलग कर दिया। इस त्रासदी के बाद पीड़ित जवान विकास न्याय पाने के लिए तीन दिनों तक अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक डिब्बे में लिए दर-दर भटकता रहा।

इस दौरान विकास ने कानपुर के रेल बाजार थाने के चक्कर काटे, कई प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह से उसे टरका दिया गया। आखिर में जब पीड़ित जवान अपनी यूनिट के सहयोग से सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा और वहां मौजूद आला अधिकारियों से रोते हुए न्याय की गुहार लगाई, तब जाकर कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त को इस संवेदनशील मामले की विशेष चिकित्सकीय जांच के आदेश दिए गए।

🪖 जब छावनी में तब्दील हो गया था कानपुर कमिश्नरेट कार्यालय: कमांडेंट गौरव ने किया घेराव की खबरों का खंडन, निष्पक्ष जांच की मांग की थी

शुरुआती दौर में कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने दोनों अस्पतालों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच करके जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने को कहा था। लेकिन दो दिन बाद ही कानपुर सीएमओ द्वारा गठित पहली स्थानीय मेडिकल टीम ने रहस्यमयी ढंग से दोनों आरोपी अस्पतालों को क्लीन चिट दे दी थी, जिससे पीड़ित जवान का न्याय से भरोसा उठ गया। दुखी होकर विकास ने यह सारी धांधली अपने आईटीबीपी मुख्यालय में तैनात कमांडेंट को विस्तार से बताई। अपने जवान के साथ हुए इस घोर अन्याय को देखकर कमांडेंट गौरव स्वयं लगभग 50 सशस्त्र जवानों की एक छोटी टुकड़ी लेकर कानपुर कमिश्नर रघुवीर लाल से सीधे उनके दफ्तर में मिलने पहुंचे।

सशस्त्र जवानों की मौजूदगी के कारण कुछ ही देर में पुलिस कमिश्नरेट ऑफिस पूरी तरह से आईटीबीपी की छावनी में तब्दील हो गया था, जिसे देख प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। इसके बाद तरह-तरह की अफवाहें उड़ने लगीं कि सेना/पैरा मिलिट्री के जवानों ने यूपी पुलिस के दफ्तर की घेराबंदी कर ली है। लेकिन बाद में कमांडेंट गौरव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात का खंडन किया और कहा कि वे केवल अपने जवान विकास सिंह की मां के साथ हुए ‘मेडिकल नेग्लिजेंस’ (चिकित्सकीय लापरवाही) की जांच के कुछ संदिग्ध और अधूरे बिंदुओं को डिस्कस करने आए थे।

कमांडेंट के तर्कों को सुनते हुए कानपुर कमिश्नर रघुवीर लाल ने अपनी गलती स्वीकार की और मामले की दोबारा री-इन्वेस्टिगेशन (दूसरी जांच) के कड़े निर्देश दिए। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की दूसरी निष्पक्ष जांच में दोनों ही नामचीन अस्पतालों को मरीज की जान जोखिम में डालने का मुख्य दोषी पाया गया है और पुलिस अब दोनों अस्पतालों को सील करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की सख्त कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।