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Jaisalmer Dumping Yard: जैसलमेर के बड़ाबाग डंपिंग यार्ड में खुले में मिले मृत गोवंश; लोगों में भारी आक्रोश

जैसलमेर: राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन शहर जैसलमेर से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित बड़ाबाग क्षेत्र का डंपिंग यार्ड एक बार फिर से विवादों और देशव्यापी चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। आबादी क्षेत्र के बिल्कुल नजदीक इस डंपिंग यार्ड के निर्माण और संचालन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन बीते लंबे समय से किया जा रहा था। गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव में बड़ाबाग के ग्रामीणों ने एकजुट होकर मतदान का पूरी तरह से बहिष्कार कर अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई थी। उस समय दोपहर 2:00 बजे तक एक भी वोट नहीं पड़ने से हड़कंप मच गया था, जिसके बाद तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशियों— रविंद्र सिंह भाटी, उम्मेदाराम बेनीवाल और कैलाश चौधरी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को डंपिंग यार्ड हटाने का पुख्ता आश्वासन दिया था, तब कहीं जाकर लोगों ने मतदान शुरू किया था।

जनप्रतिनिधियों द्वारा उस वक्त बड़े-बड़े लोकलुभावन वादे किए गए थे, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया निपटने के बाद डंपिंग यार्ड का यह संवेदनशील मामला हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में चला गया था। अब दो साल बाद (मई 2026 में) एक बार फिर यह यार्ड चर्चा में आ गया है, लेकिन इस बार मामला अत्यधिक संवेदनशील और मृत गोवंश के शवों के अपमानजनक रखरखाव से जुड़ा है, जिसको लेकर हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में काफी गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों की इस उग्र प्रतिक्रिया के बाद नगर परिषद आयुक्त द्वारा भी संबंधित ठेकेदार को तत्काल प्रभाव से ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया है।

🐄 डंपिंग यार्ड में खुले में बिखरे मिले गोवंश के शव: श्री करनी गौ रक्षा सेवा दल के अध्यक्ष हाकम दान ने वीडियो वायरल कर उठाए सवाल

दरअसल, नगर परिषद के इस सरकारी डंपिग यार्ड में मृत गोवंश के शवों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाने की बजाय सरेआम खुले में भगवान भरोसे बिखरा छोड़ने का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। इस पूरे मामले की शुरुआत दो दिन पहले तब हुई जब ‘श्री करनी गौ रक्षा सेवा दल’ के अध्यक्ष हाकम दान ने डंपिंग यार्ड का दौरा किया और वहां खुले में पड़े मृत गोवंश के शवों का एक लाइव वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो में उन्होंने शिव क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक रविंद्र सिंह भाटी को टैग करते हुए उनसे तुरंत मौके पर पहुंचने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले संबंधित भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की थी।

सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हुए इस वीडियो ने जैसलमेर नगर परिषद प्रशासन, मृत पशु उठाने वाले आधिकारिक ठेकेदार और इससे संबंधित तमाम जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कथनी-करनी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। ग्राउंड जीरो पर बड़ी संख्या में मृत गोवंश के शव अस्त-व्यस्त और क्षत-विक्षत हालत में धूप में पड़े नजर आ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों और गोभक्तों की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं।

📜 परिषद आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा का कड़ा एक्शन: लापरवाही बरतने पर ठेकेदार गोपाराम को थमाया ‘कारण बताओ नोटिस’

इस पूरे मामले के सोशल मीडिया और मीडिया में तूल पकड़ने के बाद कुंभकरणी नींद में सोया नगर परिषद प्रशासन अचानक गहरी हरकत में आया। परिषद आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा की ओर से मृत पशुओं के शव उठाने वाले अनुबंधित ठेकेदार को एक सख्त कानूनी नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी गई है कि सरकारी टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सभी मृत पशुओं का समयबद्ध, मर्यादित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण (Disposal) किया जाना चाहिए था, लेकिन मौके पर नियमों की गंभीर और अमानवीय अनियमितता सामने आई है।

नगर परिषद प्रशासन की ओर से कड़ा नोटिस जारी होने के बाद डरे हुए ठेकेदार ने आनन-फानन में जेसीबी (JCB) मशीनें लगाकर डंपिंग यार्ड में बिखरे पड़े शवों को गड्ढा खोदकर डिस्पोज करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। वहीं, मामले पर सफाई देते हुए परिषद आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा का कहना है कि अगले कुछ ही घंटों के भीतर यह कार्य पूरी तरह से मुकम्मल कर लिया जाएगा। लेकिन अब मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि यदि गोभक्तों द्वारा यह मामला उजागर नहीं किया जाता, तो क्या प्रशासनिक तंत्र यूं ही सोता रहता और स्थिति ऐसी ही भयावह बनी रहती?

🌡️ भीषण गर्मी में फैला संक्रमण और दुर्गंध का खतरा: ₹18 लाख के टेंडर के बावजूद नियमों की सरेआम अनदेखी

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार द्वारा गोसंरक्षण, गोसेवा और स्वच्छता अभियान को लेकर करोड़ों रुपये विज्ञापनों में फूंक कर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर जैसलमेर जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन शहर में मृत गोवंश के सम्मानजनक निस्तारण तक की न्यूनतम व्यवस्था नहीं हो पा रही है। मई की इस रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी में खुले में पड़े शवों के सड़ने से पूरे अंचल में भयंकर बदबू और संक्रमण (Infection) फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिससे आसपास की आबादी का जीना मुहाल हो गया है। स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ अमानवीय संवेदनहीनता करार दिया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मृत पशु उठाने, चमड़ा एवं हड्डियों के वैज्ञानिक निस्तारण का यह कार्य बाड़मेर जिले के निवासी ठेकेदार गोपाराम को करीब 18 लाख रुपए के भारी-भरकम बजट में अलॉट किया गया है। आयुक्त द्वारा जारी नोटिस में साफ उल्लेख किया गया है कि पूर्व में सख्त निर्देश दिए गए थे कि मृत पशुओं को डंपिंग यार्ड में गहरा गड्ढा खोदकर वैज्ञानिक विधि से दबाया जाए, लेकिन ठेकेदार द्वारा पैसों के लालच में नियमों की सरेआम अनदेखी की जा रही है। परिषद ने ठेकेदार को 3 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, अन्यथा उसका टेंडर निरस्त कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।