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Iran-US Nuclear Deal: ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते की फाइनल रिपोर्ट लेकर चीन पहुंचे पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर

बीजिंग/इस्लामाबाद: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से इस समय की एक बहुत बड़ी और वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) को प्रभावित करने वाली सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले बेहद गोपनीय परमाणु समझौते (Nuclear Deal) की विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपने सोमवार (25 मई) को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंच गए हैं। जनरल मुनीर यहां पर चीन के शक्तिशाली राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक विशेष और एकांत बैठक करेंगे, जहां इस महा-डील को लेकर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच गहन चर्चा होगी।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन पर्दे के पीछे से इस पूरे परमाणु समझौते की जटिल प्रक्रिया को अपनी शर्तों पर संचालित और नियंत्रित कर रहा है। वहीं, इस बेहद संवेदनशील ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते में पाकिस्तान की भूमिका केवल एक ‘मैसेंजर’ (संदेशवाहक) की है, जो दोनों महाशक्तियों और ईरान के बीच गुप्त संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है। प्रतिष्ठित ‘डॉन’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के तूफानी दौरे से सीधे लौटने के तुरंत बाद जनरल मुनीर बीजिंग पहुंच गए हैं। इस रणनीतिक दौरे पर मुनीर के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी विशेष रूप से चीन में मौजूद हैं।

🇨🇳 राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सौंपेंगे परमाणु समझौते की पूरी फाइनल रिपोर्ट: ठप पड़ी वार्ता को चीन ने ऐसे किया री-स्टार्ट

जनरल आसिम मुनीर अपने इस चीन दौरे के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच तैयार हुए नए न्यूक्लियर ड्राफ्ट को लेकर जिनपिंग को पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट सौंपेंगे। दरअसल, इसकी पटकथा तब लिखी गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने के मध्य में चीन के आधिकारिक दौरे पर गए थे, उस समय ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता पूरी तरह से ठप और डेडलॉक का शिकार पड़ी थी। तब राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद बीजिंग से इस गतिरोध को तोड़ने में मदद के लिए विशेष आग्रह किया था, जिसके बाद चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को नए सिरे से इस कूटनीतिक प्रक्रिया को शुरू करने का कड़ा आदेश दिया था।

चीन की मध्यस्थता में सबसे पहले दोनों देशों (अमेरिका-ईरान) के बीच रणनीतिक ड्राफ्ट का आदान-प्रदान हुआ। फिर यह सहमति बनी कि पूर्ण समझौते से पहले कुछ जरूरी अंतरिम समझौते (Interim Agreements) किए जाएंगे और इसके बाद ही फाइनल समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। जनरल मुनीर इस न्यूक्लियर ड्राफ्ट को फाइनल करवाने के लिए खुद ही वाशिंगटन (अमेरिका) का विशेष सीक्रेट मैसेज लेकर ईरान की राजधानी तेहरान गए थे, जहां मुनीर ने ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन और ईरान के वार्ता दल के प्रमुख गालिबफ के साथ बेहद गोपनीय और लंबी मुलाकातें की थीं। इसके बाद मुनीर ने ईरान का जवाब वापस अमेरिका को भेजा, जिस पर व्हाइट हाउस ने अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी। अब मुनीर इसी पूरी सफलता की अंतिम कड़ियों को जिनपिंग के सामने रखने चीन पहुंचे हैं।

🔮 क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तय करेंगे फ्यूचर एक्शन प्लान? ईरान को सता रहा है अमेरिका के मुकरने का डर

विदेशी कूटनीतिक रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ जनरल मुनीर इस परमाणु डील के भविष्य और आगे की रणनीति (Future Action Plan) को लेकर विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे। दरअसल, इस समझौते में सबसे बड़ा पेंच यह फंसा है कि ईरान चाहता है कि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह पक्की और लिखित गारंटी मिले कि भविष्य में इस नई डील का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

इस बीच, पत्रकारों से बेहद सधे हुए अंदाज में बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि, “अभी तक हमें इस डील की कोई ठोस वैश्विक गारंटी नहीं मिली है। हम सैद्धांतिक तौर पर कुछ मुख्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहमत जरूर हुए हैं, लेकिन तुरंत पूर्ण डील हो जाए, इसकी गुंजाइश अभी नजर नहीं आती।”

दरअसल, ईरान को पुराने कड़वे अनुभवों के आधार पर यह गहरा डर सता रहा है कि आने वाले वक्त में अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति के कारण इस डील से दोबारा मुकर सकता है, जिससे ईरान को फिर से आर्थिक प्रतिबंधों और जंग के विनाशकारी दलदल में उतरना पड़ेगा। ईरान चाहता है कि दुनिया की कोई सुपरपावर (वैश्विक शक्ति) इस बात की लिखित गारंटी ले कि भविष्य में अमेरिका उस पर कभी भी सैन्य हमला नहीं करेगा। चीन इस भूमिका के लिए ईरान की नजरों में सबसे ज्यादा मुफीद और भरोसेमंद देश है। ऐसे में मुनीर और जिनपिंग के बीच इस गारंटी क्लॉज को लेकर बेहद गंभीर बातचीत होने वाली है। आपको बता दें कि चीन हमेशा से ईरान का बड़ा रणनीतिक सहयोगी देश रहा है और हालिया मध्य-पूर्व जंग में ईरान को चीन ने उन्नत सैटेलाइट डेटा और आधुनिक हथियार भी उपलब्ध कराए थे।