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Bilaspur Court Decision: बिलासपुर में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कड़ी सजा; कोर्ट का बड़ा फैसला

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की एक विशेष अदालत ने महिला एवं बाल अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग किशोरी को शादी का झूठा झांसा देकर भगा ले जाने और उसके साथ अनाचार (दुष्कर्म) करने वाले आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कड़े सश्रम कारावास (कठोर जेल) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर उचित अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है, जिसे न पटाने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस बड़े अदालती फैसले से समाज में अपराधियों के बीच एक कड़ा संदेश गया है।

👮 उत्कृष्ट विवेचना करने वाले ASI मोतीलाल सूर्यवंशी की एसएसपी ने की सराहना: मनोबल बढ़ाने के लिए नकद इनाम की घोषणा

इस संवेदनशील मामले में वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाकर कोर्ट के समक्ष मजबूत पैरवी करने और उत्कृष्ट विवेचना (जांच) करने वाले चौकी बेलगहना के सहायक उप निरीक्षक (ASI) मोतीलाल सूर्यवंशी की वरिष्ठ अधिकारियों ने जमकर पीठ थपथपाई है। बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने एएसआई सूर्यवंशी के कार्य की सराहना करते हुए उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है। एसएसपी ने कहा कि इस तरह की त्वरित और सटीक जांच से ही पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय मिल पाता है और पुलिस विभाग का गौरव बढ़ता है।

📂 अप्रैल 2024 में दर्ज हुई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट: डीएसपी नुपूर उपाध्याय ने दी पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी

मामले के संबंध में जानकारी देते हुए डीएसपी (DSP) नुपूर उपाध्याय ने बताया कि बेलगहना थाना क्षेत्र में रहने वाली पीड़ित किशोरी के परिजनों ने 13 अप्रैल 2024 को चौकी में आकर अपनी बेटी की गुमशुदगी की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों ने पुलिस को बताया था कि उनकी नाबालिग बेटी को ग्राम सिलपहरी का रहने वाला रामसागर मानिकपुरी बहला-फुसलाकर और शादी का झांसा देकर अपने साथ कहीं भगा ले गया है। परिजनों की इस गंभीर शिकायत पर बेलगहना पुलिस ने तत्काल पोक्सो एक्ट (POCSO Act) और अपहरण की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर मामले की कड़ाई से विवेचना शुरू की थी।

🔍 एएसआई मोतीलाल सूर्यवंशी को सौंपी गई थी जांच: तत्परता से आरोपी को दबोचकर जेल की सलाखों के पीछे भेजा

अपराध पंजीबद्ध होने के तुरंत बाद मामले की सघन जांच की कमान सहायक उप निरीक्षक (ASI) मोतीलाल सूर्यवंशी को सौंपी गई थी। एएसआई सूर्यवंशी ने साइबर सेल की मदद और तकनीकी इनपुट्स के आधार पर बेहद कम समय में आरोपी रामसागर मानिकपुरी के छिपने के ठिकाने का पता लगाया और घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। इसके साथ ही नाबालिग किशोरी को सकुशल बरामद कर उसका डॉक्टरी मुलाहजा कराया गया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने बिना कोई वक्त गंवाए कोर्ट में चालान पेश किया, जिसके बाद मिले पुख्ता गवाहों और सबूतों के आधार पर आज विशेष न्यायालय ने आरोपी को इस कृत्य के लिए 20 साल के लिए जेल भेज दिया।