Jharkhand Cyber Crime: विदेशों में बाल पोर्नोग्राफी बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़, झारखंड CID ने 2 को किया गिरफ्तार
रांची: तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो से मिली बेहद संवेदनशील इनपुट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए झारखंड सीआईडी (CID) की विशेष टीम ने चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल (CSAE) की ऑनलाइन अवैध बिक्री करने वाले एक बड़े गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क इतना खतरनाक और विस्तृत था कि ओमान, बांग्लादेश एवं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नागरिकों को भी आपत्तिजनक अश्लील सामग्री ऑनलाइन माध्यमों से मोटी रकम लेकर बेची जा रही थी। सीआईडी की इस कामयाबी से देश-विदेश में बैठे इस काले धंधे के आकाओं में हड़कंप मच गया है।
📱 टेलीग्राम चैनलों के जरिए फैला था जाल: गिरिडीह के कोलडीह क्षेत्र से वहाब अंसारी और हसन रजा गिरफ्तार
झारखंड सीआईडी मुख्यालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो को तेलंगाना राज्य के चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट से कुछ पुख्ता डिजिटल इनपुट प्राप्त हुए थे, जिसके आधार पर सीसीपीएस कांड संख्या 41/26 दर्ज किया गया था। यह पूरी सूचना ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल के अवैध प्रसार एवं व्यावसायिक विक्रय से संबंधित थी। इस कांड के तकनीकी विश्लेषण और सर्विलांस के क्रम में सीआईडी की टीम ने गिरिडीह जिला अंतर्गत कोलडीह क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर दो मुख्य अभियुक्तों, वहाब अंसारी और हसन रजा को गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्तों के कब्जे से इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन एवं कई अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में भारी मात्रा में ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज से संबंधित सामग्री प्राप्त हुई है।
🌐 ओमान, यूएई और बांग्लादेश के नागरिक थे खरीदार: डिजिटल साक्ष्यों के संकलन के साथ आई4सी (i4c) की टीम भी जांच में जुटी
सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के फोन की जांच के दौरान कई गुप्त टेलीग्राम चैनल एवं ग्रुप्स की पहचान की गई है, जिनमें ये दोनों अभियुक्त सक्रिय एडमिन और सदस्य के रूप में जुड़े हुए थे तथा आपत्तिजनक सामग्री का धड़ल्ले से आदान-प्रदान एवं प्रसार कर रहे थे। अनुसंधान में यह भी चौंकाने वाला सच प्रकाश में आया है कि उक्त आपत्तिजनक सामग्री भारत के अलावा ओमान, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नागरिकों को भी इंटरनेशनल गेटवे और ऑनलाइन माध्यमों से बेची जा रही थी। मामले में सभी डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक संकलन कर अग्रेतर अनुसंधान किया जा रहा है तथा इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड्स की पहचान के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की एजेंसी आई4सी (i4c) के साथ मिलकर कार्रवाई जारी है।
💻 बोकारो में भी हो चुका है ऐसे ही नेटवर्क का भंडाफोड़: अंकित और विवेक कुमार पहले ही जा चुके हैं जेल
आपको बता दें कि चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल की ऑनलाइन बिक्री का यह पहला मामला नहीं है जो झारखंड से जुड़ा हुआ है। इससे पहले भी झारखंड सीआईडी की साइबर क्राइम ब्रांच टीम ने बोकारो में बड़ी छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस दौरान एक अवैध वेबसाइट और उससे जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और उत्पीड़न सामग्री उपलब्ध करवाने वाले एक बड़े संगठित नेटवर्क का खुलासा किया गया था। बोकारो में पकड़े गए आरोपियों द्वारा एक फर्जी वेबसाइट का डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में दुरुपयोग कर चाइल्ड पोर्नोग्राफी परोसी जा रही थी। वे इस अश्लील सामग्री को संगठित तरीके से बेचने और छिपाने के लिए टेलीग्राम चैनलों और ‘मेगा’ (Mega) जैसी क्लाउड स्टोरेज सेवाओं का उपयोग कर रहे थे, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा था। इस मामले में सीआईडी ने बोकारो जिले से अंकित कुमार और विवेक कुमार नाम के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
💵 ₹499 से ₹1699 में होती थी ऑनलाइन डील: पहले छोटा वीडियो क्लिप दिखाकर क्यूआर कोड से वसूलते थे पैसे
सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, इन अपराधियों के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था। पकड़े गए आरोपी पहले डार्क वेब या अन्य स्रोतों से अश्लील वीडियो हासिल करते थे और फिर टेलीग्राम जैसे ऐप पर उस प्रतिबंधित वीडियो का एक छोटा सा कतरन (शॉर्ट क्लिप) डालते थे। वीडियो क्लिप देखने के बाद देश-विदेश में बैठे विकृत मानसिकता के लोग पूरी फिल्म की डिमांड करते थे। इसके बाद आरोपियों के द्वारा इंटरनेशनल कस्टमर्स को विशेष क्यूआर कोड (QR Code) या डिजिटल लिंक भेजा जाता था। ऑनलाइन पेमेंट कन्फर्म होने के बाद पूरी वीडियो का लिंक पैसे देने वाले व्यक्तियों तक सीधे पहुंचा दिया जाता था। आरोपियों ने पूछताछ में कबूला है कि वे लोग प्रति वीडियो 499 रुपये से लेकर 1699 रुपये तक वसूलते थे। सीआईडी को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों के बड़े गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं।