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Sant Kabir Nagar News: मदरसा बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डीएम और कमिश्नर का आदेश रद्द

संतकबीरनगर: ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के मदरसे पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने बस्ती मंडल के कमिश्नर और संतकबीरनगर के डीएम द्वारा जारी मदरसा ध्वस्तीकरण और जमीन को सरकारी घोषित करने के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी जमीन को सरकारी घोषित करने का अधिकार केवल एसडीएम (SDM) कोर्ट के पास है, जबकि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया।

📝 मदरसा कमेटी की याचिका: बिना उचित नोटिस के कार्रवाई का लगाया आरोप

मदरसा कमेटी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि प्रशासन ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और पर्याप्त नोटिस दिए बिना मदरसे पर बुलडोजर चलाया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और पूरी कार्रवाई को प्रथम दृष्टया अवैध बताया। कमेटी ने अब अवैध ध्वस्तीकरण के लिए उचित मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

📋 विवाद की पृष्ठभूमि: 2024 में दर्ज हुई थी अवैध निर्माण की शिकायत

इस मामले की शुरुआत 2024 में हुई थी, जब खलीलाबाद गांव निवासी अब्दुल हकीम ने एसडीएम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। नवंबर 2025 में एसडीएम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। मदरसा कमेटी ने इस आदेश को पहले डीएम और फिर बस्ती मंडलायुक्त के पास चुनौती दी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। 25 अप्रैल 2026 को अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी थी।

🚜 13 घंटे चला बुलडोजर: भारी पुलिस बल की तैनाती में ढहाया गया निर्माण

अपील खारिज होते ही 25 और 26 अप्रैल को प्रशासन ने मदरसे पर बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की। करीब 13 घंटे तक चली इस कार्रवाई में बाउंड्री वॉल और 10 से अधिक पिलर तोड़ दिए गए। अगले दिन दो पोकलेन मशीनों और पांच बुलडोजरों के साथ अभियान फिर शुरू हुआ, लेकिन मजबूत पिलरों की वजह से इसे रोकना पड़ा। इस दौरान मौके पर 30 महिला पुलिसकर्मियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मी और पीएसी (PAC) की दो कंपनियां तैनात थीं।

🛑 हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: 27 अप्रैल को लगाई थी रोक, अब आदेश किया निरस्त

कार्रवाई के बीच ही 27 अप्रैल को हाईकोर्ट ने मदरसे पर आगे की किसी भी तोड़फोड़ पर रोक लगा दी थी। अब विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने 14 नवंबर 2025 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया है, जिसमें जमीन को ‘स्टेट लैंड’ घोषित किया गया था। कोर्ट के इस फैसले से जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं मदरसा प्रबंधन ने इसे न्याय की जीत बताया है।