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Patna News: बालगृह के बच्चों के लिए बिहार सरकार की बड़ी पहल, 14 ट्रेड में मिलेगी फ्री ट्रेनिंग और नौकरी

पटना: बिहार में बालगृहों में रहने वाले बच्चों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य बाल संरक्षण समिति ने एक महत्वपूर्ण पहल दोबारा शुरू की है। इस योजना के तहत अब बाल देख-रेख संस्थानों में रहने वाले किशोरों और युवाओं को 14 विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें इंटर्नशिप और सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

👦 16 से 18 वर्ष के किशोरों को लाभ: कौशल विकास से संवरेगा भविष्य

समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को सशक्त बनाना है, जो किसी कारणवश अपने परिवार से अलग होकर बालगृहों में रह रहे हैं। योजना का लाभ 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को मिलेगा। विशेष बात यह है कि यह योजना पिछले तीन वर्षों से बंद थी, जिसे अब नई ऊर्जा के साथ फिर से लागू किया गया है।

🛠️ इन 14 ट्रेड में फ्री ट्रेनिंग और नौकरी: होटल मैनेजमेंट से लेकर डेयरी तक के विकल्प

प्रशिक्षण के लिए 14 अलग-अलग क्षेत्रों का चयन किया गया है, जो आज के समय में मांग में हैं। इनमें होटल मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, फूड एंड बेवरेज प्रोसेसिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, कार्गो और लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग एवं बिजनेस, कंप्यूटर ऑपरेटर, जनरल ड्यूटी असिस्टेंट, टेक्सटाइल, पर्यावरण प्रबंधन, रेफ्रिजरेशन, योग एवं पीटी इंस्ट्रक्टर, कृषि और डेयरी आधारित कोर्स शामिल हैं।

💰 इंटर्नशिप के दौरान आर्थिक मदद: 6 से 8 हजार रुपए तक मिलेगा स्टाइपेंड

प्रशिक्षण के बाद चयनित एजेंसियां युवाओं के लिए इंटर्नशिप और प्लेसमेंट की व्यवस्था करेंगी। इंटर्नशिप के दौरान उन्हें 6,000 से 8,000 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाएगा ताकि वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें। समिति के अनुसार, इस योजना के सफल क्रियान्वयन का उदाहरण यह है कि पहले से ही 20 युवा बेंगलुरु के नामी होटलों में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।

🏢 एजेंसियों के लिए सख्त मानक: 50 लाख का टर्नओवर और CSR मॉडल अनिवार्य

योजना को संचालित करने वाली एजेंसियों के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। इन्हें सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी; उन्हें यह कार्यक्रम अपने संसाधनों या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से चलाना होगा। इसके अलावा, एजेंसियों के लिए न्यूनतम 50 लाख रुपए वार्षिक टर्नओवर की शर्त अनिवार्य रूप से रखी गई है।

🛡️ सुरक्षा सर्वोपरि: लड़कियों के लिए विशेष आवासीय प्रबंध और महिला स्टाफ

लड़कियों और लड़कों के लिए पूरी तरह से अलग आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। विशेष रूप से लड़कियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्यस्थलों पर महिला कर्मियों की उपलब्धता भी अनिवार्य होगी। बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह योजना जरूरतमंद बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगी।