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Haryana Politics: रेखा शर्मा के बयान से गरमाई सियासत, 3 जून को बड़ा फैसला ले सकते हैं कुलदीप बिश्नोई

तपती गर्मी के बीच इन दिनों हरियाणा की राजनीति में भी पूरी तरह से गर्माहट बनी हुई है। शुक्रवार को जहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की यात्रा में पहुंचे थे तो वहीं नगर निगम के चुनावों को लेकर शह-मात का खेल रहा। इन सबके बीच पिछले माह में भाजपा की राज्यसभा की सदस्य रेखा शर्मा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चौ. भजनलाल व उनके बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई पर की गई टिप्पणी के बाद जहां चौ. भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई उन्हें कानूनी नोटिस भेज चुके हैं, तो छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई भी लगातार पलटवार कर रहे हैं। यही नहीं, रेखा शर्मा के बयान के बाद चौ. भजनलाल के समर्थकों में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

🏛️ भजनलाल परिवार का मजबूत राजनीतिक इतिहास

गौरतलब है कि चौ. भजनलाल 9 बार आदमपुर से विधायक रहने के अलावा 3 बार प्रदेश के मुख्यमंत्री, 3 बार लोकसभा के सदस्य एवं 2 बार केंद्र में मंत्री रहे हैं। इसी तरह से चंद्रमोहन बिश्नोई 4 बार कालका से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में वह पंचकूला से कांग्रेस के विधायक हैं। ऐसे ही कुलदीप बिश्नोई 4 बार आदमपुर से विधायक रहने के अलावा एक बार हिसार से जबकि एक बार भिवानी से सांसद रह चुके हैं। कुलदीप बिश्नोई इस समय विदेश में हैं और वह अगले सप्ताह भारत वापस आएंगे। माना जा रहा है कि अपने समर्थकों के साथ बैठक करने के बाद 3 जून को चौ. भजनलाल की पुण्यतिथि पर वह कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

🤔 कुलदीप बिश्नोई का अगला कदम क्या होगा?

कुलदीप बिश्नोई का हरियाणा व राजस्थान के साथ पंजाब के भी कुछ क्षेत्रों में प्रभाव माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उछल रहा है कि कुलदीप बिश्नोई का अगला कदम क्या होगा? अगर कुलदीप बिश्नोई भाजपा से अलग राह चुनते हैं तो इसका असर केवल आदमपुर या हिसार तक सीमित नहीं रहेगा। हरियाणा की राजनीति में अक्सर चुनाव 2 से 5 प्रतिशत वोट के अंतर से तय होते हैं। ऐसे में यदि भजनलाल व कुलदीप समर्थक वोट बैंक भाजपा से दूर होता है तो कई सीटों पर सीधा नुकसान संभव माना जा रहा है। विशेषकर वे क्षेत्र जहां गैर-जाट मतदाता भाजपा का मुख्य आधार रहे हैं, वहां राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

🛤️ कुलदीप बिश्नोई के पास बचे हैं ये 3 बड़े राजनीतिक विकल्प

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कुलदीप बिश्नोई के पास 3 विकल्प हैं। पहला यह कि वह भाजपा में ही रहें और संघर्ष करते हुए सम्मान की लड़ाई लड़ें, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ता दबाव और भावनात्मक माहौल इस राह को आसान नहीं रहने दे रहा। दूसरा विकल्प है कि वह कांग्रेस में वापसी करें, लेकिन हरियाणा कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मजबूत प्रभाव देखते हुए वहां कुलदीप बिश्नोई के लिए स्वतंत्र राजनीतिक स्पेस सीमित माना जा रहा है। तीसरा और सबसे चर्चित विकल्प है कि संघर्ष की राह चुनकर फिर से अपनी अलग राजनीतिक ताकत खड़ी करना। ऐसे में माना जा रहा है कि चौ. भजनलाल की पुण्यतिथि पर 3 जून को कार्यकर्ताओं से राय-मशविरा करने के बाद कुलदीप बिश्नोई एक बार फिर अपने क्षेत्रीय दल का गठन करने का बड़ा निर्णय ले सकते हैं।