ब्रेकिंग
PM Modi Sikkim Visit: सिक्किम के 50 साल पूरे होने पर पीएम मोदी की बड़ी सौगात, ₹4000 करोड़ के प्रोजेक... SCO Meeting 2026: बिश्केक में SCO की बैठक में शामिल होंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, क्षेत्रीय सुरक्ष... Firozabad Crime News: फिरोजाबाद में दिनदहाड़े 10 लाख की लूट, तमंचा सटाकर युवक से छीने पैसे, जांच में... Maharashtra MLC Election: शिंदे की शिवसेना में मचा घमासान, नीलम गोरे और बच्चू कडू की उम्मीदवारी पर व... Free Petrol Offer: फ्री पेट्रोल पाने के लिए लगी वाहनों की लंबी लाइन, पंप मालिक के एक फैसले से खिले च... UP Crime Update: हापुड़ में आग का कहर! 70 झुग्गियां और 2 फैक्ट्रियां जलकर स्वाह, मची भारी अफरा-तफरी Positive News: घर आई नन्हीं परी तो पिता ने डॉक्टरों के लिए किया कुछ ऐसा, देखकर पूरा अस्पताल हो गया भ... Dehradun Weather Update: देहरादून में गर्मी ने तोड़ा 17 साल का रिकॉर्ड, रेड अलर्ट जारी; जानें कब मिल... Madhya Pradesh Crime: रीवा में चोरी का अनोखा तरीका, अंडरवियर में छिपाए ब्रांडेड कपड़े, सीसीटीवी में ... Ghazipur News: पीड़ित परिवार से मिलने कल गाजीपुर जाएगा सपा का प्रतिनिधिमंडल, अखिलेश यादव देंगे ₹5 ला...

US vs China AI War: DeepSeek समेत चीनी AI कंपनियों पर अमेरिका सख्त; डेटा चोरी और ‘मॉडल डिस्टिलेशन’ के लगे गंभीर आरोप

अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी की जंग एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है. इस बार विवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर है. अमेरिका ने दुनियाभर में अपने राजनयिकों को निर्देश दिया है कि वे चीनी AI कंपनियों द्वारा अमेरिकी तकनीक के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताएं. रिपोर्ट के मुताबिक, DeepSeek, Moonshot AI और MiniMax जैसी कंपनियों पर अमेरिकी AI मॉडल की तकनीक इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा की तैयारी चल रही है. इससे दोनों देशों के बीच तकनीकी तनाव और बढ़ सकता है.

DeepSeek पर क्यों भड़का अमेरिका

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने एक गोपनीय कूटनीतिक संदेश के जरिए दुनियाभर के अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिए हैं. इसमें कहा गया है कि चीनी कंपनियां अमेरिकी AI मॉडल से तकनीक निकालकर अपने मॉडल तैयार कर रही हैं. खासतौर पर DeepSeek का नाम प्रमुखता से लिया गया है. अमेरिका का कहना है कि इस तरह तैयार किए गए मॉडल कम लागत में बेहतर प्रदर्शन का दावा करते हैं, लेकिन इनमें मूल मॉडल जैसी पूरी क्षमता नहीं होती. साथ ही, इनमें सुरक्षा और निष्पक्षता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल भी कमजोर हो सकते हैं.

क्या है AI Distillation और क्यों है विवाद

AI Distillation एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें बड़े और महंगे AI मॉडल के आउटपुट का इस्तेमाल करके छोटे और सस्ते मॉडल तैयार किए जाते हैं. इससे डेवलपमेंट लागत काफी कम हो जाती है. अमेरिका का आरोप है कि कुछ चीनी कंपनियां बिना अनुमति के अमेरिकी कंपनियों के स्वामित्व वाले मॉडल का इस्तेमाल कर रही हैं. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI ने भी फरवरी में अमेरिकी सांसदों को चेतावनी दी थी कि DeepSeek जैसी कंपनियां ChatGPT और अन्य अमेरिकी AI मॉडल की नकल करने की कोशिश कर रही हैं. यही वजह है कि यह मुद्दा अब वैश्विक स्तर पर उठाया जा रहा है.

ट्रंप की चीन यात्रा से पहले बढ़ा तनाव

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं. पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों के बीच तकनीकी तनाव कुछ कम हुआ था, लेकिन अब यह विवाद फिर से माहौल गर्म कर सकता है. चीन ने अमेरिकी आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वह बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा को गंभीरता से लेता है. DeepSeek ने हाल ही में हुआवेई चिप्स के लिए नया AI मॉडल भी पेश किया है, जिससे चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता और मजबूत हुई है.