ब्रेकिंग
Bihar News: बिहार में राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन रद्द, CM सम्राट चौधरी ने पलटा विजय सिन्हा का फै... Lucknow KGMU: लखनऊ केजीएमयू में 12वीं पास बना फर्जी डॉक्टर, एमबीबीएस की फर्जी डिग्री के साथ डॉ. हसम ... Prayagraj Junction News: प्रयागराज जंक्शन की 'संगमरमर मस्जिद' को रेलवे ने थमाया नोटिस, 27 अप्रैल तक ... Bihar Transport News: बिहार में कॉमर्शियल बाइक के लिए अब सिर्फ ₹1150 में मिलेगा 5 साल का परमिट, घर ब... ढाई साल तक एडल्ट जेल में क्यों रहा नाबालिग?" सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार, पीड़ित को 5 ... West Bengal Politics: बंगाल में कैसा रहेगा कांग्रेस का प्रदर्शन? सचिन पायलट ने किया जीत का दावा, BJP... Pahalgam Tragedy: पहलगाम में जान गंवाने वाले IB अधिकारी के परिवार का छलका दर्द, बोले- "बोझ बन गई है ... Kerala Blast: केरल की पटाखा यूनिट में भीषण ब्लास्ट, 6 की मौत और 40 घायल; मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन जार... Sabarimala Case: सबरीमाला मंदिर में भेदभाव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, क्या संविधान वंचितों के अध... Ludhiana Auto Protest: लुधियाना में ऑटो चालकों का जबरदस्त प्रदर्शन, मांगों को लेकर घेरा DC ऑफिस; शहर...

Sabarimala Case: सबरीमाला मंदिर में भेदभाव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, क्या संविधान वंचितों के अधिकारों की रक्षा नहीं करेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बहुत ही गंभीर सवाल पूछते हुए कहा कि अगर कोई श्रद्धालु पूरे मन से मंदिर जाता है, लेकिन उसे मूर्ति छूने की इजाजत नहीं दी जाती, तो क्या संविधान उसकी रक्षा नहीं करेगा? यह सवाल कोर्ट ने सबरीमला मंदिर के मुख्य पुजारी से पूछा. कोर्ट इस समय केरल के सबरीमाला मंदिर समेत दूसरे धार्मिक स्थानों पर होने वाले भेदभाव की सुनवाई कर रहा है. खासकर, महिलाओं और कुछ खास समुदायों के लोगों को मंदिरों में आने या पूजा करने पर लगी पाबंदियों पर कोर्ट में सवाल उठाए जा रहे हैं.

यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों वाली एक बड़ी संविधान पीठ कर रही है. इस पीठ में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और दूसरे जज शामिल हैं. यह पीठ यह तय करने की कोशिश कर रही है कि धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों के बीच की सीमा कहां है.

पुजारी की तरफ से क्या कहा गया?

मंदिर के पुजारी की तरफ से वरिष्ठ वकील वी. गिरी ने दलील दी. उन्होंने कहा:

  • किसी भी मंदिर के नियम और रीति-रिवाज उस धर्म का अहम हिस्सा होते हैं.
  • जब कोई भक्त मंदिर जाता है, तो उसे वहाँ के देवता के गुणों को मानना ही पड़ता है.
  • भक्त का काम देवता के सामने झुकना होता है, उल्टा चलने का उसे अधिकार नहीं है.

तब जस्टिस अमानुल्ला ने पूछा ये सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला ने बहुत साफ शब्दों में पूछा, “जब मैं मंदिर जाता हूं, तो मेरी पूरी आस्था होती है कि वह भगवान ही मेरा सिरजनहार है. मैं बिल्कुल साफ मन से जाता हूं, मेरे दिल में कोई गंदगी नहीं होती. लेकिन वहां जाकर मुझे बता दिया जाता है कि मेरे जन्म या मेरी जाति की वजह से मैं भगवान को छू नहीं सकता. तो बताइए, क्या संविधान मेरी मदद नहीं करेगा?”

जस्टिस ने आगे कहा कि भगवान और उसकी बनाई सृष्टि (इंसान) में कोई फर्क नहीं हो सकता. अगर भगवान ने सबको बनाया है, तो फिर किसी एक को छूने से कैसे रोका जा सकता है?

पुजारी के वकील ने जस्टिस का दिया जवाब

पुजारी के वकील ने कहा कि अगर किसी जाति या जन्म की वजह से किसी को पुजारी बनने से पूरी तरह रोका जाता है, तो उसका समाधान संविधान के अनुच्छेद 25(2)(ख) के तहत कानून बनाकर किया जा सकता है. यानी राज्य या कानून इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट यह जानना चाह रहा है कि क्या धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर किसी श्रद्धालु को भेदभाव सहना पड़ेगा? क्या संविधान का संरक्षण सिर्फ कुछ लोगों के लिए है या हर उस इंसान के लिए है, जो ईमानदारी से पूजा करने मंदिर पहुंचता है? इस मामले की सुनवाई अभी जारी है. अब देखना होगा इसपर क्या आखिरी फैसला लिया जाएगा.