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Chhatarpur News: केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध तेज, आदिवासी समाज ने क्यों दी ‘न्याय दो या मौत दो’ की चेतावनी?

Ken Betwa Link Project: मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का आदिवासी समाज विरोध कर रहा है. गुरुवार को हजारों की संख्या में आदिवासी, किसान और महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ नदी के बीच उतरकर विरोध जताए. आंदोलनकारियों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए नदी किनारे प्रतीकात्मक चिताएं बनाईं और उन पर लेटकर जल-सत्याग्रह किया.

आदिवासी समाज के लोगों ने विरोध जताते हुए कहा कि हमें न्याय दो या मौत दो. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जन किसान नेता अमित भटनागर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि प्रशासन आंदोलन को दबाने के लिए राशन-पानी रोकने, सीमाएं सील करने और लोगों को डराने-धमकाने जैसे कदम उठा रहा है. उन्होंने कहा कि पन्ना और छतरपुर के ग्रामीण अब एकजुट हो चुके हैं और यह लड़ाई केवल मुआवजे तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि जल, जंगल और जमीन बचाने का बड़ा संघर्ष बन चुकी है.

प्रशासन ने किसानों को रोका

गुरुवार को करीब 5 हजार आदिवासी किसान मुआवजे में गड़बड़ी की शिकायत लेकर दिल्ली जाने के लिए निकले थे, लेकिन छतरपुर प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. किसानों का आरोप है कि उनके वाहनों को जब्त कर चालान किया गया, जिससे उनमें भारी नाराजगी फैल गई. इसके बाद गुस्साए किसान निर्माणाधीन बांध स्थल पर पहुंच गए और काम को पूरी तरह ठप कर दिया. पिछले तीन दिनों से परियोजना का निर्माण कार्य बंद है, जिससे निर्माण कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान होने की बात सामने आ रही है.

प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है और आंदोलनकारियों को हटाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. वहीं, आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. पुलिस और प्रशासन की टीम बांध का काम दोबारा शुरू कराने के लिए लगातार दबाव बना रही है. साथ ही, टाइगर रिजर्व क्षेत्र (पीटीआर) के सभी रास्तों को बंद कर दिया गया है.

24 गांवों का विस्थापन प्रस्तावित

आंदोलन के नेता अमित भटनागर के खिलाफ वन अधिनियम के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध प्रवेश का मामला भी दर्ज किया गया है. इस परियोजना के तहत कुल 24 गांवों का विस्थापन प्रस्तावित है. इनमें से 8 गांव सीधे डूब क्षेत्र में आते हैं, जहां विरोध सबसे ज्यादा है, जबकि 16 गांव टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शामिल किए जा रहे हैं. ग्रामीणों का मुख्य विरोध पुनर्वास को लेकर है. उनका कहना है कि उन्हें विकसित गांवों में बसाया जाए, भूखंड दिया जाए और 5 लाख रुपये का मुआवजा मिले. दूसरी ओर प्रशासन 12.50 लाख रुपये का मुआवजा देकर मामला समाप्त करना चाहता है, जिसे ग्रामीण पर्याप्त नहीं मानते.