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Tikamgarh Tourism: टीकमगढ़ के बड़ागांव धसान की खास पहचान हैं ये हनुमान जी, जानें क्यों कहा जाता है इन्हें ‘स्वयंभू’

टीकमगढ़ : अक्सर किसी भी शहर, कस्बा और गांव की पहचान उसकी कुछ खासियत से होती है. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में एक ऐसा ही गांव है बड़ागांव धसान. इस गांव को दूरदराज के लोग यहां स्वयंभू भगवान हनुमान जी महाराज के कारण जानते हैं. प्राचीन काल में यहां हनुमान जी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी. कहा जाता है कि हनुमान जी महाराज का एक पैर पाताल लोक से जुड़ा है.

मंशापूर्ण हनुमानजी का मंदिर विख्यात

टीकमगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर दूर बड़ागांव धसान स्थित मंशापूर्ण हनुमानजी का मंदिर संपूर्ण बुंदेलखंड में विख्यात है. यहां कई जिलों से भक्त पूर्वमुखी मंशापूर्ण हनुमान जीके दर्शन करने पहुंचते हैं और अपनी अर्जी लगाते हैं. लोगों का मानना है कि जो भी भक्त मंशापूर्ण हनुमान जी के दरबार में आते हैं हनुमान जी महाराज उनकी मंशा पूर्ण करते हैं. इसलिए यह मंदिर मंशापूर्ण हनुमान जी के नाम से प्रसिद्ध है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है. मंशापूर्ण हनुमान जी की चमत्कारिक प्रतिमा है. यह प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी. इसलिए इन्हें स्वयं भू हनुमान कहा जाता है. हनुमान जी का एक पैर पाताल लोक से जुड़ा है. यह प्रतिमा अद्वितीय है और इनके दर्शन मात्र से लोगों के कष्ट दूर होते हैं.

हनुमान जी को पसंद है पीपल की छांव में रहना

श्रद्धालु राकेश गुप्ता ने बताया ” हनुमान जी को पीपल की छांव पसंद है. लोग बताते हैं कि जब कभी भी नगरवासियों ने हनुमान जी को छत बनाकर, टीन शेड लगाकर छाया देने की कोशिश की तो आंधी तूफान के कारण वह एक दिन भी नहीं ठहर सकी. इसलिए लोगों का विश्वास है कि हनुमान जी को पीपल की छांव में खुले में रहना पसंद है.” बागेश्वर नाम के धीरेन्द्र शास्त्री ने भी कहा है “यदि किसी को अयोध्या की हनुमान गढ़ी के दर्शन करना है तो आप पहले बड़ागांव जाइये और दर्शन कीजिए.”

हनुमान जी की पूर्वमुखी प्रतिमा

मंदिर के पुजारी त्यागी जी महाराज ने बताया “यहां असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं.” पंडित दीपक मिश्रा ने बताया “अधिकांश जगह दक्षिण मुखी हनुमान जी की प्रतिमाएं हैं लेकिन बड़ागांव के मंदिर में यह ऐसी प्रतिमा है जो पूर्वमुखी है और ऐसा लगता है कि हनुमान जी एक बार फिर सूर्य को निगलने की कोशिश कर रहे हों, यह अद्भुत और चमत्कारी प्रतिमा है.”