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Ram Navami News: मद्देड में 70 साल पुरानी परंपरा, 5 दिन तक चलता है सीता-राम ‘कल्याणम्’

बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के मद्देड गांव में रामनवमी के अवसर खास परंपरा निभाई जाती है. यहां हर साल सीता-राम विवाह महोत्सव में श्रद्धालु जुटते हैं. इस बार भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ महोत्सव मनाया गया. यह परंपरा करीब 70 सालों से लगातार चली आ रही है और क्षेत्र की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है.

तेलंगाना पद्धति से विवाह

इस आयोजन की खास बात यह है कि सीता-राम का विवाह तेलंगाना की पारंपरिक पद्धति से कराया जाता है. इससे यहां छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की मिली-जुली संस्कृति की झलक देखने को मिलती है.

पांच दिन तक चलता है कार्यक्रम

महोत्सव कुल पांच दिनों तक चलता है जिसमें पहले दिन की सगाई की रस्म, वहीं रामनवमी के दिन: ‘कल्याणम’ यानी मुख्य विवाह समारोह होता है. इसके बाद भी नागवेल्ली की परंपरा समेत कई रस्में निभाई जाती है. इस तरह अलग-अलग रस्मों के साथ ये महोत्सव 5 दिनों तक चलता हैं.

शुरुआत रामनवमी से एक दिन पहले भगवान श्रीराम और माता सीता की सगाई रस्म से होती है. रामनवमी के दिन ‘कल्याणम’ अर्थात विवाह का मुख्य कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया जाता है– मद्देड निवासी भक्त चित्तापुरी श्याम

इस वर्ष भी ‘कल्याणम’ के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित हुए. सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण तेलंगाना और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होने आते हैं- श्रद्धालु मिथलेश मंचरला

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

विवाह समारोह के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. आसपास के गांवों के साथ-साथ तेलंगाना और महाराष्ट्र से भी लोग इस आयोजन में शामिल होने आते हैं.

आकर्षक झांकियां

महोत्सव में धार्मिक झांकियां भी निकाली जाती हैं, जैसे सीता हरण, माता सीता की वापसी, गहनों की चोरी ये झांकियां आयोजन को और जीवंत और आकर्षक बनाती हैं.

भक्ति और मेले का माहौल

पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना से माहौल भक्तिमय बना रहता है. रामनवमी के दिन यहां बड़ा मेला भी लगता है, जिसमें मीना बाजार, झूले और तरह-तरह की दुकानें लगती हैं. यहां हर उम्र के लोग इसका आनंद लेते हैं.

बेहतर व्यवस्थाएं

स्थानीय समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद वितरण के अलावा सुरक्षा व्यवस्था भी अच्छी तरह की गई थी. आयोजन के दौरान मंदिर परिसर और आसपास का पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगा नजर आया.

एकता और संस्कृति का प्रतीक

यह महोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक मेलजोल का प्रतीक भी है. अलग-अलग राज्यों के लोग यहां मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.