रतलाम पुलिस का ‘डिजिटल स्ट्राइक’! साइबर ठगों के चंगुल से छुड़ाए 92.5 लाख रुपये; पीड़ितों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, जानें कैसे मिली कामयाबी
रतलाम : पुलिस ने बीते 9 महीनो में साइबर ठगी के शिकार हुए पीड़ितों के लिए बड़ी राहत दी है. ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में अब तक 92 लाख 56 हजार रु साइबर फ्रॉड के शिकार हुए पीड़ितों के बैंक खातों में वापस लाने में पुलिस सफल हुई है. साइबर सेल की टीम ने जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक कुल ₹96 लाख 56 हजार की साइबर ठगी की राशि पीड़ितों के खातों में वापस दिलवाई है. रतलाम पुलिस द्वारा साइबर ठगी को लेकर विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें साइबर फ्रॉड को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाने और ठगी होने की स्थिति में तुरंत बैंक अकाउंट फ्रीज करने जैसी कार्रवाई टीम द्वारा की गई थी. इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं और साइबर पुलिस आम लोगों की गाड़ी मेहनत का पैसा फ्रॉड से बचाने में सफल भी हुई है.
फाइनेंशियल फ्रॉड को लेकर रतलाम पुलिस सख्त
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार द्वारा सभी थाना प्रभारियों व जिला साइबर सेल को निर्देशित किया गया था कि फाइनेंशियल फ्रॉड से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. साइबर सेल द्वारा प्राप्त शिकायतों पर त्वरित रिस्पॉन्स किया गया, जिससे इस अभियान में अच्छे रिजल्ट मिले हैं. एडिशनल एसपी विवेक कुमार ने बताया, ” साइबर सेल द्वारा हेल्पलाइन एवं प्राप्त आवेदनों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराया गया तथा विधि अनुसार राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया अपनाई गई. जिससे अब तक साइबर फ्रॉड के पीड़ित फरियादियों को उनके बैंक खातों में 92 लाख 56 हजार रुपए की राशि वापस लौटाई गई है.”
एडिशनले एसपी ने बताया कि साइबर सेल की टीम जिसमें निरीक्षक अमित कोरी, उप निरीक्षक जीवन बारिया, प्रधान आरक्षक हिम्मत सिंह, आरक्षक मोर सिंह डामोर एवं आरक्षक राहुल पाटीदार शामिल है द्वारा साइबर ठगी से संबंधित मामलों पर कड़ी मेहनत कर लोगों को रुपए वापस दिलवाने में सराहनीय भूमिका निभाई है.
समय रहते दें साइबर ठगी की जानकारी
रतलाम एडिशनल एसपी विवेक कुमार ने बताया, ” यदि समय रहते हैं अपने साथ हुए साइबर अपराध की जानकारी पुलिस को दी जाए तो ठगी गई राशि को वापस लाना संभव है. रतलाम पुलिस ने सभी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या निकटतम पुलिस थाने में सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर राशि को सुरक्षित किया जा सके. वहीं, अन्य साइबर अपराध जिसमें डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाएं भी होती हैं, उससे भी आम लोग सावधान रहें.