झारखंड विधानसभा में ‘मर्यादा’ तार-तार! JMM विधायक की बदजुबानी पर मंत्री ने मांगी माफी; महिला विधायकों का वेल में जोरदार हंगामा
रांचीः बजट सत्र के सेकेंड लास्ट दिन प्रश्नकाल के दौरान झामुमो विधायक समीर कुमार मोहंती द्वारा एक दिन पूर्व सदन में इस्तेमाल की गई असंसदीय भाषा का मामला जोर शोर से उठा. भाजपा विधायक नीरा यादव ने स्पीकर से आग्रह किया कि इतनी भद्दी भाषा का इस्तेमाल करने वाले विधायक को सदन में माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही देखने के लिए स्कूल की बच्चियां आई हुई हैं. एक विधायक के ऐसे आचरण का उनपर क्या प्रभाव पड़ेगा. नीरा यादव इतनी नाराज थीं कि वेल में पहुंच गईं. उनका समर्थन विपक्ष की दूसरी महिला विधायकों ने भी किया. मामले को तूल पकड़ता देख संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पूरे सदन की ओर से माफी मांगी और असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर खेद जताया.
प्रोसिडिंग से हटाई गई असंसदीय टिप्पणी
इससे पहले महिला विधायकों की नाराजगी को देखते हुए स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि विधायक की असंसदीय टिप्पणी को प्रोसिडिंग से हटा दिया गया है. उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों का भी हवाला दिया. महिला विधायकों के हंगामे से सदन में कुछ देर के लिए असहज स्थिति उत्पन्न हो गई. स्पीकर ने कहा कि विधानसभा में संसदीय और असंसदीय भाषा की डिक्सनरी है. इसलिए सभी विधायकों को ऐसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिससे किसी को तकलीफ हो. इसलिए, समीर मोहंती के असंसदीय शब्द की जानकारी मिलते ही उसे प्रोसिडिंग से हटा दिया गया.
मंत्री सुदिव्य कुमार ने महिला विधायकों की भावना को बताया जायज
इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि विपक्षी विधायकों की भावना जायज है. उन्होंने कहा कि जब असंसदीय भाषा का इस्तेमाल हुआ था, उसी समय मामला उठना चाहिए था. फिलहाल, आसन की ओर से नियमन दिया जा चुका है. लिहाजा, महिला विधायकों को शांत हो जाना चाहिए. महिला विधायकों ने आरोप लगाया कि अक्सर सदन में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल होता है जो निंदनीय है.
सदन की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी सबकी
हंगामा बढ़ा तो संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है. भाषण के क्रम में ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए जिससे ना सिर्फ सदस्य आहत हों, बल्कि सदन की गरिमा आहत हो. उन्होंने कहा कि कल ही असंसदीय भाषा पर आसन से नियमन आ गया था. फिर भी महिला सदस्यों की पीड़ा का सम्मान करते हुए उन्होंने पूरे सदन की ओर से क्षमा याचना की. तब जाकर मामला शांत हुआ.