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दिल्ली में ‘Zero’ बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बंद हो जाएगा मुफ्त लाभ?

दिल्ली सरकार मुफ्त बिजली योजना में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जिनके घरों में बिजली की खपत नाम मात्र की है या बिल्कुल शून्य है. अगर आपका कोई मकान लंबे समय से बंद पड़ा है और वहां बिजली का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो अब आपकी सब्सिडी रोकी जा सकती है. इस बदलाव के बाद करीब 44.5 लाख घरों के बिजली बिलों पर 200 रुपये तक का फिक्स्ड चार्ज लग सकता है.

बंद मकानों पर फिक्स्ड चार्ज की मार

सरकार की नजर अब ‘डोरमेंट’ यानी निष्क्रिय बिजली उपभोक्ताओं पर है. ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने नाम पर मीटर तो लगवा रखा है, लेकिन उनके घर की मासिक बिजली खपत न के बराबर है. अभी तक नियम यह था कि 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर बिल पूरी तरह से जीरो आता था. इस जीरो बिल में फिक्स्ड चार्ज भी माफ होता था, जिसका भुगतान सरकार अपनी तरफ से सीधे बिजली कंपनियों को करती थी. लेकिन नए प्लान के तहत, अगर घर बंद है और मीटर की रीडिंग शून्य है, तो सरकार वह सब्सिडी रोक देगी.

क्या हैं ‘डोरमेंट’ उपभोक्ता?

विभाग द्वारा बिजली बिलों के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर सामने आया कि साल के तीन से चार महीने, खासकर सर्दियों के मौसम में, हजारों कनेक्शनों पर बिजली का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता. ऐसे उपभोक्ता अक्सर ज्यादातर समय दिल्ली से बाहर रहते हैं. इसके अलावा, एक हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई कि सब्सिडी का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने की होड़ में कई लोगों ने एक ही घर में अलग-अलग बिजली कनेक्शन ले रखे हैं. इसी का नतीजा है कि साल 2020 से 2025 के बीच राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में 12 लाख से ज्यादा का भारी इजाफा हुआ, जबकि इस दौरान पानी के उपभोक्ताओं की संख्या उस अनुपात में बिल्कुल नहीं बढ़ी.

4000 करोड़ के पार पहुंचा सब्सिडी का वित्तीय बोझ

सरकार के इस सख्त कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण बिजली सब्सिडी पर लगातार बढ़ता हुआ खर्च है. जब यह योजना वित्त वर्ष 2015-16 में शुरू हुई थी, तब सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ 1,442.76 करोड़ रुपये था. पिछले एक दशक में यह आंकड़ा बेतहाशा बढ़ा है. साल 2021-22 में यह 3,250 करोड़ रुपये था, जो अब 2025-26 के लिए 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. मौजूदा समय में दिल्ली में कुल 62 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक 58.72 लाख लोगों ने सब्सिडी का लाभ उठाया

तय होगी न्यूनतम बिजली खपत की सीमा

वर्तमान नियमों के अनुसार, दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने पर कोई बिल नहीं आता. 201 से 400 यूनिट तक की खपत पर सरकार 50 प्रतिशत (अधिकतम 800 रुपये तक) की छूट देती है, जबकि 401 यूनिट के पार जाने पर सब्सिडी पूरी तरह खत्म हो जाती है. अधिकारियों का कहना है कि अब निष्क्रिय उपभोक्ताओं की पहचान करने के लिए एक ‘न्यूनतम बिजली यूनिट खर्च’ की सीमा तय की जाएगी. अगर महीने की कुल खपत उस तय सीमा से कम रहती है, तो उपभोक्ता को सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा.